राजस्थान के गौरवशाली नगर और स्थल: एक विस्तृत यात्रा 🇮🇳
राजस्थान, 'राजाओं की भूमि', अपने समृद्ध इतिहास, बेमिसाल स्थापत्य कला और जीवंत संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहाँ का हर शहर और किला अपने आप में एक कहानी समेटे हुए है। आइए, इस गौरवशाली राज्य के प्रमुख नगरों और स्थलों की एक विस्तृत यात्रा करते हैं।
अजमेर: राजस्थान का हृदय स्थल ❤️
अजमेर/अजयमेरू की स्थापना 1113 ईस्वी में चौहान वंशी शासक अजयराज ने की थी। 1 नवम्बर, 1956 को राजस्थान के एकीकरण के सातवें चरण में अजमेर का विलय राजस्थान में हुआ और यह 26वाँ जिला बना।
उपनाम: राजस्थान का हृदय, भारत का मक्का, राजस्थान का नाका, और राजपूताने की कुंजी।
- पुष्कर झील: इसे हिन्दुओं का पाँचवाँ तीर्थ, तीर्थराज, तीर्थों का मामा, और कोंकण तीर्थ कहा जाता है। यह राजस्थान की सबसे प्राचीन, पवित्र और बड़ी प्राकृतिक (क्रेटर/काल्डेरा) झील है, जिसमें 52 घाट हैं। विश्व प्रसिद्ध ब्रह्माजी के मंदिर का निर्माण गोकुल चन्द्र पारीक ने करवाया था। महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना इसी झील के किनारे की थी। यहाँ कार्तिक शुक्ला एकादशी से पूर्णिमा तक मेला भरता है।
- अढ़ाई दिन का झोंपड़ा: हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य कला का यह उदाहरण मूलतः चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ द्वारा सन् 1153 ईस्वी में संस्कृत पाठशाला के लिए बनवाया गया था। बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा इसे मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। यहाँ मुस्लिम फकीर पंजाब शाह का ढाई दिन का उर्स लगता है।
- आनासागर झील: इसका निर्माण अर्णोराज चौहान ने करवाया था। इसके किनारे सम्राट जहाँगीर ने दौलत बाग (वर्तमान में सुभाष उद्यान) बनवाया, जबकि शाहजहाँ ने संगमरमर का पाँच बारहदरियों का निर्माण करवाया था।
- सोनी जी की नसियां: यह जैन समुदाय के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव या आदिनाथ को समर्पित है।
- तारागढ़ (गढ़बीठली): लार्ड विलियम बैंटिंग ने 1832 में इसे राजस्थान का जिब्राल्टर कहा था। दुर्ग के सबसे ऊँचे स्थान पर मीर साहब की दरगाह है, जो तारागढ़ के प्रथम गवर्नर मीर सैयद हुसैन खिंगसवार की है।
- मेयो कॉलेज: इसकी औपचारिक शुरुआत 1875 से मानी जाती है, जहाँ राजपरिवार से जुड़े लोगों को शिक्षा दी जाती थी।
- मांगलियावास: यह कस्बा 800 वर्ष पुराने कल्पवृक्ष के लिए प्रसिद्ध है।
- सलेमाबाद: राजस्थान में निम्बाक सम्प्रदाय का प्रमुख केन्द्र है।
- तिलोनिया: यह सामाजिक कार्य शोध केन्द्र, मैग्सेसे पुरस्कार विजेता अरुणा राय की कर्मस्थली है, जिसकी स्थापना श्री बंकर राय द्वारा बेयर फ़ूट संस्थान के रूप में की गई थी।
अलवर: राजस्थान का सिंहद्वार 🦁
आमेर के शासक कोकिल देव के कुंवर अलधराज ने 1049 ईस्वी में अलपुर नाम से इसकी स्थापना की थी। 25 नवम्बर, 1775 ईस्वी में राव प्रतापसिंह ने इसे अलवर राज्य की राजधानी घोषित किया। महाजनपद काल में यह क्षेत्र मत्स्य जनपद के नाम से प्रसिद्ध था।
- मत्स्य संघ: राजस्थान के एकीकरण के समय 18 मार्च, 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर तथा करौली को मिलाकर मत्स्य संघ बनाया गया था।
- मूसी महारानी की छतरी: इसे 80 खम्भों की छतरी कहा जाता है। इसका निर्माण महाराजा विनयसिंह ने बख्तावर सिंह की पासवान मूसी महारानी की स्मृति में करवाया था।
- सिलीसेढ़ झील: इसे राजस्थान का नंदनकानन भी कहा जाता है।
- पांडुपोल: यहाँ हनुमान जी की शयन मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है।
- सरिस्का टाइगर रिजर्व: इसे 1978 में बाघ परियोजना के अन्तर्गत लिया गया।
- नीमराणा: यहाँ राज्य का तीसरा निर्यात संवर्द्वन औद्योगिक पार्क स्थापित किया गया है।
- भानगढ़ का किला: इसे भारत की सर्वाधिक रहस्यमयी जगह मानी जाती है।
- भिवाड़ी: यहाँ फ्रांस की सेंट गोबेन कम्पनी द्वारा ग्लास संयंत्र स्थापित किया गया है।
बांसवाड़ा: सौ द्वीपों का शहर 🏝️
बाँसवाड़ा की नींव उदयसिंह के पुत्र महारावल जगमाल सिंह ने डाली थी।
- मानगढ़ धाम: इसे राजस्थान का जलियाँवाला बाग के नाम से प्रसिद्ध है। 17 नवम्बर, 1913 को यहाँ गोविंद गुरु के नेतृत्व में हुई सभा पर अंग्रेजों की गोलीबारी में 1500 आदिवासी मारे गए थे।
- माही बजाज सागर बांध: यह राजस्थान का सबसे लंबा बांध है।
- छप्पन का मैदान: बाँसवाड़ा व प्रतापगढ़ के मध्य स्थित छप्पन गाँवों का समूह छप्पन का मैदान कहलाता है।
- मेवल: डूंगरपुर व बांसवाड़ा के बीच का भाग मेवल कहलाता है।
बारां: सहरिया जनजाति का कुंभ 🏹
10 अप्रैल 1991 को इसे कोटा से अलग कर नया जिला बनाया गया थ।
- सीताबाड़ी: यहाँ लक्ष्मण कुंड, सीता कुंड तथा वाल्मीकि कुण्ड है। यह सहरिया जनजाति का प्रमुख स्थल है, जहाँ के मेले को सहरिया जनजाति का कुंभ कहा जाता है।
- भंडदेवरा: इसे राजस्थान का मिनी खजुराहो कहते हैं।
- शेरगढ़ दुर्ग: परवन नदी के किनारे स्थित इस दुर्ग का मूल नाम कोषवद्धन था।
बाड़मेर: रेगिस्तान का जलमहल 🏜️
यह अजरक प्रिंट व मलीर प्रिंट हस्तकला के लिए प्रसिद्ध है।
- सिवाना दुर्ग: इसे जालौर दुर्ग की कुंजी कहा जाता है। यह छप्पन की पहाड़ियों के सर्वोच्च शिखर हल्देश्वर पर बना हुआ है। अलाउद्दीन खिलजी ने दुर्ग जीतने के बाद इसका नाम खैराबाद कर दिया था।
- किराड़ू: इसे राजस्थान का खजुराहो कहा जाता है। यह प्राचीनकाल में किरातकूप के नाम से विख्यात था।
- नाकोड़ा: यह जैन मतावलम्बियों का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है, जिसे प्राचीन काल का मेवानगर कहा जाता था।
- तिलवाड़ा: यहाँ मल्लीनाथ जी का पशु मेला भरता है, जो राजस्थान का सबसे प्राचीन पशु मेला माना जाता है।
- उड़काश्मेर गांव: यह लोकदेवता रामदेवजी का जन्म स्थान था।
- बाटाडू का कुआं: इसे रेगिस्तान का जलमहल कहा जाता है।
- पचपदरा झील: इस झील से प्राप्त नमक में Nacl की उपलब्धता 98% है।
भरतपुर: राजस्थान का प्रवेशद्वार 🚪
भरतपुर को राजस्थान का प्रवेशद्वार कहा जाता है। महाराजा सुरजमल के द्वारा 1722 ईस्वी में यह शहर बसाया गया था।
- लोहागढ़ दुर्ग: मिट्टी से निर्मित यह दुर्ग अपनी अजेयता के कारण लोहागढ़ कहलाता है। इसका निर्माण 1733 ई. में जाट शासक सुरजमल ने करवाया था। लॉर्ड लेक भी 1805 में इस किले को नहीं जीत पाया था।
- डीग: डीग को जलमहलों की नगरी कहा जाता है।
- खानवा: 17 मार्च, 1527 को यहाँ बाबर व राणा सांगा के मध्य युद्ध हुआ था।
- केवलादेव 'घना' राष्ट्रीय उद्यान: इसे प्रवासी पक्षियों की आश्रय स्थली तथा पक्षियों का स्वर्ग कहा जाता है। 1985 में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया।
- बंध बारेठा अभयारण्य: इसे परिन्दों का घर कहा जाता है।
- मोती झील बांध: इसे भरतपुर की जीवनरेखा कहा जाता है।
भीलवाड़ा: वस्त्र नगरी 🧶
वस्त्र उत्पादन में अग्रणी होने के कारण भीलवाड़ा को वस्त्र नगरी, टैक्सटाइल सिटी, राजस्थान का मेनेचेस्टर कहा जाता है। इसे अभ्रक नगरी भी कहा जाता है।
- बिजोलिया: इसका प्राचीन नाम विन्ध्यावली था। यहाँ भारत का सबसे लम्बा व संगठित किसान आन्दोलन चला था।
- शाहपुरा: यहाँ फड़ चित्रकला हेतु जोशी परिवार प्रसिद्ध है। यह राजस्थान की एकमात्र रियासत थी, जहाँ के शासक सुदर्शनदेव ने 14 अगस्त, 1947 को पूर्ण उत्तरदायी शासन की स्थापना की।
- बागोर: कोठारी नदी के तट पर स्थित यह भारत का सबसे बड़ा मध्यपाषाणकालीन स्थल है। यहाँ से पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
- हुरड़ा: 17 जुलाई, 1734 को मेवाड़ के शासक जगतसिंह द्वितीय की अध्यक्षता में मराठों को रोकने के उद्देश्य से सम्मेलन बुलाया गया था।
बूंदी: छोटी काशी और बावड़ियों का शहर ⛲
बूंदी को छोटी काशी तथा बावड़ियों का शहर कहा जाता है। इसकी स्थापना 1241 में देवीसिंह हाडा के द्वारा की गई थी।
- तारागढ़ दुर्ग: इसका निर्माण 1354 ईस्वी में बरसिंह के द्वारा करवाया गया था। रुडयार्ड किपलिंग ने इस दुर्ग के बारे में कहा था कि "इस दुर्ग का निर्माण भूत-प्रेतों ने करवाया था"। इसमें गर्भगुंजन तोप स्थित है।
- रामगढ़ विषधारी अभयारण्य: इसे हाल ही में राजस्थान का चौथा टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है। इसे बाघों का जच्चा घर कहा जाता है।
- रानी जी की बावड़ी: 1699 ईस्वी में नाथावत जी द्वारा निर्मित यह बावड़ी राजस्थान की सबसे लम्बी बावड़ियों में से एक है।
- चित्रशाला: तारागढ़ दुर्ग में स्थित इस चित्रशाला में सर्वाधिक पक्षियों का चित्रण किया गया है।
- 84 खम्भों की छतरी: इसका निर्माण अनिरूद्ध सिंह ने अपने धाय भाई देवा की याद में करवाया था।
चित्तौड़गढ़: राजस्थान का गौरव 🏰
चित्तौड़गढ़ को राजस्थान का गौरव कहा जाता है। इसका प्राचीन नाम मेदपाट, प्राग्वाट, शिवि थे।
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग: इसे दुर्गों का सिरमौर कहा जाता है। यह गम्भीरी व बेड़च नदियों के संगम पर मेसा के पठार पर स्थित है। श्यामलदास की रचना वीर विनोद के अनुसार इसका निर्माण चित्रांगद मौर्य ने करवाया था। यह दुर्ग अपने तीन साकों के लिए प्रसिद्ध है।
- विजय स्तम्भ: मेवाड़ के शासक राणा कुंभा ने इसकी आधारशिला 1440 ईस्वी में रखी और यह 1448 ईस्वी में पूर्ण हुआ। इसे भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष और विष्णु ध्वज भी कहा जाता है।
- भैंसरोड़गढ़ किला: इस दुर्ग को राजस्थान का वेल्लोर कहा जाता है। कर्नल जेम्स टॉड ने कहा था कि "यदि उन्हें राजस्थान में एक जागीर की पेशकश की जाए तो वह भैंसरोडगढ़ को चुनेगे"।
- रावतभाटा: यह राजस्थान की अणुनगरी के रूप में प्रसिद्ध है, यहाँ भारत का दूसरा अणुशक्ति केन्द्र स्थापित किया गया जो कनाडा के सहयोग से स्थापित किया गया था।
- भुपाल सागर: यहाँ 1932 ईस्वी में निजी क्षेत्र में स्थापित राजस्थान का पहला चीनी कारखाना, द मेवाड़ शुगर मिल्स, स्थित है।
चूरू: चांदी के गोले दागने वाला किला 🥈
ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार चूरू की स्थापना 1620 में चुहड़ा नामक जाट ने की थी।
- तालछापर अभयारण्य: यह विशेष रूप से काले हिरणों के लिए प्रसिद्ध है।
- ददरेवा: यह लोकदेवता गोगाजी की जन्मस्थली है।
- चूरू का किला: इसका निर्माण 1739 ईस्वी में ठाकुर कुशालसिंह के द्वारा करवाया गया था। यहाँ चांदी के गोले दागे गए थे, जब शिवसिंह के समय बीकानेर रियासत ने आक्रमण किया था।
- दुधवा खारा किसान आन्दोलन: इस आंदोलन का नेतृत्व मघाराम वैध, हनुमान सिंह आर्य तथा रघुवरदयाल ने किया था।
दौसा: कच्छवाह राजवंश की प्रथम राजधानी 👑
1137 ईस्वी में कच्छवाह राजवंश के संस्थापक दुल्हेराय ने यहाँ के बड़गुजरों को पराजित कर इसे कच्छवाह राजवंश की प्रथम राजधानी बनाया था।
- आभानेरी: यह प्रतिहारों द्वारा 8वीं-9वीं शताब्दी में निर्मित कलात्मक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ हर्षत माता मंदिर स्थित है।
- आलूदा: 14 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि को लाल किले की प्राचीर से फहराया गया पहला तिरंगा, दौसा के आलूदा गांव के बुनकरों ने बुना था।
- बांदीकुई जंक्शन: राजस्थान की प्रथम रेलगाड़ी आगरा फोर्ट से बांदीकुई तक 1874 में चलाई गई थी।
- आभानेरी की चांद बावड़ी: यह 13 मंजिला तथा 100 फीट गहरी है।
धौलपुर: रेड डायमण्ड 💎
धौलपुर को रेड डायमण्ड, सूर्योद्य की नगरी तथा कोटी के नाम से जाना जाता है। यह क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे छोटा जिला है। यह विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने वाली राजस्थान की अंतिम रियासत थी।
- मचकुंड: मचकुण्ड को तीर्थस्थलों का भांजा कहा जाता है।
- शेरगढ़ दुर्ग: इस दुर्ग में हुनहुंकार तोप है।
- बाग ए निलोफर: मुगल वंश के संस्थापक बाबर ने अपनी आत्मकथा 'तुजुक-ए-बाबरी' में इसका उल्लेख किया है।
डूंगरपुर: पहाड़ों की नगरी ⛰️
डूंगरपुर की स्थापना 1358 ईस्वी में डूंगरसिंह ने की थी। इसे पहाड़ों की नगरी कहते हैं।
- बेणेश्वर धाम: सोम, माही, जाखम नदियों के संगम पर मेला भरता है, जिसे आदिवासियों का कुम्भ कहा जाता है।
- नवलखा बावड़ी: इसका निर्माण आसकरण की रानी प्रीमल देवी ने करवाया था।
- गलियाकोट: यह दाऊदी बोहरा समुदाय का प्रमुख पवित्र स्थल है।
जयपुर: गुलाबी नगरी और भारत का पेरिस 💖
जयपुर क्षेत्र ऐतिहासिक काल में ढूँढाड़ प्रदेश के नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना 18 नवम्बर, 1727 को सवाई जयसिंह के द्वारा की गई थी। इसका वास्तुकार विधाधर भट्टाचार्य (बंगाली ब्राह्मण) थे।
उपनाम: भारत का पेरिस, गुलाबी नगरी, तथा वैज्ञानिक सी.वी. रमन ने इसे आइलैण्ड ऑफ ग्लोरी कहा। शहर को गुलाबी रंग रामसिंह द्वितीय द्वारा प्रिंस अल्बर्ट के आगमन के उपलक्ष्य में करवाया गया था।
- हवामहल: इसका निर्माण 1799 में प्रतापसिंह ने करवाया था, वास्तुकार लालचंद थे। यह 5 मंजिला है, जिसमें शरद मंदिर, रत्न मंदिर, विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर और हवा मंदिर हैं।
- नाहरगढ़ किला: इसका निर्माण सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा 1734 ईस्वी में मराठों के आक्रमण से सुरक्षा हेतु करवाया गया था। इसका प्रारंभिक नाम सुदर्शनगढ़ था। इसमें समरूप आकृति के नौ महल बने हुए हैं।
- जयगढ़: यहाँ एशिया की सबसे बड़ी तोप जयबाण स्थित है।
- आमेर: यह कच्छवाह वंश की राजधानी थी। यहाँ शिलादेवी (आराध्य देवी) और जगत शिरोमणी का मंदिर है।
- जंतर-मंतर: सवाई जयसिंह द्वारा 1734 ईस्वी में निर्मित यह वेधशाला विश्व धरोहर के रूप में संरक्षित है।
- ईसरलाट (सरगासुली): इसका निर्माण ईश्वरी सिंह ने 1747 में राजमहल के युद्ध में अपने भाई माधोसिंह को पराजित करने के उपलक्ष्य में किया था।
- गलता: जयपुर में स्थित गलता को मंकी वैली कहा जाता है।
जोधपुर: सूर्यनगरी और ब्लू सिटी ☀️
जोधपुर की स्थापना 1459 ईस्वी में राव जोधा के द्वारा की गई थी।
उपनाम: सूर्यनगरी, ब्लू सिटी, तथा मरूस्थल का प्रवेश द्वार।
- मेहरानगढ़ दुर्ग: चिड़ियाटूक पहाड़ी पर स्थित इस दुर्ग का निर्माण 1459 में राव जोधा ने करवाया था। इस दुर्ग की नींव करणी माता के द्वारा रखी गई थी। किले में किलकिल, शम्भुबाण तथा गजनीखां प्रसिद्ध तोपें हैं।
- जसवन्तथड़ा: इसे राजस्थान का ताजमहल कहा जाता है। इसका निर्माण सरदार सिंह ने जसवन्त सिंह द्वितीय की स्मृति में 1906 में करवाया था।
- खेजड़ली गांव: यहाँ विश्व में एकमात्र वृक्ष मेला भाद्रपद शुक्ला दशमी को आयोजित किया जाता है। अमृता देवी विश्नोई के नेतृत्व में यहाँ 363 स्त्री-पुरुषों ने वृक्षों को बचाने के लिए बलिदान दिया था।
- मण्डोर: यह प्रतिहार वंश के शासकों की राजधानी रहा था। यह उत्तर भारत का रावण का एकमात्र मंदिर है, और यहीं 33 करोड़ देवी-देवताओं की 'साल' है।
- ओसियां: इसे राजस्थान का भुवनेश्वर कहा जाता है।
उदयपुर: झीलों की नगरी 🛶
झीलों की नगरी उदयपुर शहर की स्थापना मेवाड़ के महाराणा उदयसिंह के द्वारा 1559 में की गई थी।
उपनाम: राजस्थान का कश्मीर, सैलानियों का स्वर्ग, तथा फांउटेन व माउंटेन का शहर।
- जयसमन्द झील: यह राजस्थान की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। इसे ढेबर झील भी कहा जाता है।
- पिछोला झील: इसका निर्माण राणा लाखा के समय एक बंजारे ने करवाया था। इसके मध्य जग मंदिर व जग निवास महल स्थित हैं।
- सहेलियों की बाड़ी: मेवाड़ के महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने इसका निर्माण करवाया था।
- चन्द्रमहल (सिटी पैलेस): पिछोला झील के किनारे स्थित इस महल को फर्ग्यूसन ने राजस्थान के विंडसर महल की संज्ञा दी है।
- बांडोली: यहाँ महाराणा प्रताप की आठ खम्भों की छतरी बनी हुई है।
- नागदा: यह मेवाड़ की प्रथम व प्राचीनतम राजधानी थी।
अन्य महत्वपूर्ण नगरों और स्थलों का संक्षिप्त परिचय 🗺️
हनुमानगढ़
- 12 जुलाई, 1994 को राजस्थान का 31वां जिला बना।
- भटनेर दुर्ग: राजस्थान में सर्वाधिक विदेशी आक्रमण इसी दुर्ग पर हुए थे। तैमूर ने इसे संपूर्ण भारतवर्ष का सबसे मजबूत किला बताया था। मंगलवार के दिन विजित होने के कारण इसका नाम हनुमानगढ़ पड़ा।
- कालीबंगा: यहाँ से जूते हुए खेत के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
- गोगामेड़ी: यह गोगाजी के समाधि स्थल को कहते हैं।
झालावाड़
- यह अंग्रेजों द्वारा स्थापित राजस्थान की सबसे नवीन रियासत है।
- उपनाम: संतरा उत्पादन में अग्रणी होने के कारण राजस्थान का नागपुर कहा जाता है।
- गागरोन दुर्ग: कालीसिंध व आहू नदियों के संगम पर स्थित राजस्थान का एकमात्र जल दुर्ग है। यहाँ संत पीपा की छतरी स्थित है।
- झालरापाटन: मंदिरों की अधिकता के कारण इसे घंटियों का नगर भी कहते हैं। यहाँ शीतलेश्वर महादेव मंदिर है, जो राजस्थान का सबसे प्राचीन तिथियुक्त मंदिर है।
- कोलवी की बौद्ध गुफाएं: इन्हें राजस्थान की अजन्ता-एलोरा गुफा कहा जाता है।
जैसलमेर
- उपनाम: स्वर्णनगरी, हवेलियों तथा झरोखों की नगरी।
- जैसलमेर दुर्ग: इसे सोनारगढ़, त्रिकुटगढ़, गोरहरान दुर्ग भी कहते हैं। किले का दोहरा परकोटा कमरकोट कहलाता है, जिसमें 99 बुर्ज हैं।
- कुलधरा: यह खंडहर के कारण भूतिया गांव कहा जाता है।
- पोकरण: यहाँ मई, 1974 को स्माइलिंग बुद्धा के नाम से परमाणु परीक्षण किया गया।
- आकल वुड फॉसिल्स पार्क: यहाँ से 18 करोड़ वर्ष पुराने पेड़-पौधों के जीवाश्म प्राप्त हुए हैं।
कोटा
- उपनाम: औद्योगिक और शैश्षणिक नगरी, राजस्थान का कानपुर।
- अबली मीणी का महल: इसका निर्माण 1658 में राव मुकुन्द सिंह ने करवाया था।
- केथून: यह कोटा-डोरिया साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, और यहीं भारत का सबसे पहला विभीषण जी का मंदिर है।
- मुकुन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान: यहाँ प्रसिद्ध गागरोनी तोता पाया जाता है, जो हुबहू मानव की नकल कर सकता है।
अन्य प्रमुख तथ्य
- नागौर: इसे धातु नगरी व औजार नगरी के नाम से जाना जाता है। पंचायती राज व्यवस्था की शुरूआत 2 अक्टूबर, 1959 को पंडित जवाहरलाल नेहरू के द्वारा यहीं से की गई थी।
- पाली: रणकपुर का जैन मंदिर 1444 स्तंभों पर स्थित है, जिस कारण इसे स्तंभों का वन कहा जाता है।
- प्रतापगढ़: इसे कांठल प्रदेश उपनाम से भी जाना जाता है। यहाँ थेवा कला (कांच पर सोना मढ़ना) प्रसिद्ध है।
- राजसमंद: कुम्भलगढ़ दुर्ग को मेवाड़ को आँख कहा जाता है। यहीं महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था।
- टोंक: इसे नवाबों की नगरी कहते हैं। मुबारक महल ऊँटों की कुर्बानी के लिए प्रसिद्ध है।
- सिरोही: माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र पर्वतीय पर्यटक स्थल है। गुरुशिखर यहाँ की सबसे ऊँची चोटी है (1722 मीटर)।
- श्रीगंगानगर: इसे राजस्थान के अन्न का कटोरा तथा बागानों की भूमि कहा जाता है। यहाँ एशिया का सबसे बड़ा कृषि फार्म (सूरतगढ़) रूस की सहायता से स्थापित किया गया था।
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