चंद्रमा के रहस्य: क्यों बदलता है इसका आकार और अन्य रोचक तथ्य
पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह – चंद्रमा के बारे में विस्तृत जानकारी
चंद्रमा का परिचय
चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। यह पृथ्वी के चारों ओर अंडाकार (elliptical) कक्षा में चक्कर लगाता है और पृथ्वी से सबसे निकटतम खगोलीय पिंड है।
- औसत दूरी: लगभग 3,84,000 किलोमीटर
- न्यूनतम दूरी (Perigee): लगभग 3,63,300 किलोमीटर
- अधिकतम दूरी (Apogee): लगभग 4,05,500 किलोमीटर
चंद्रमा में अपना कोई प्रकाश नहीं होता। हम जो चमक देखते हैं, वह सूर्य का प्रकाश है जो चंद्रमा की सतह से परावर्तित होकर पृथ्वी पर आता है। इस प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग 1.3 सेकंड का समय लगता है।
चंद्रमा का आकार क्यों बदलता दिखता है?
चंद्रमा का आकार नहीं बदलता, लेकिन पृथ्वी से देखने पर यह अलग-अलग आकार का दिखाई देता है। यह चंद्र कलाओं (Phases of the Moon) के कारण होता है। चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है और सूर्य की रोशनी अलग-अलग कोण से पड़ती है, जिससे हमें कभी पूरा, कभी आधा या थोड़ा-सा ही दिखाई देता है।
चंद्रमा की कुल 8 प्रमुख कलाएँ मानी जाती हैं:
- अमावस्या (New Moon)
- शुक्ल पक्ष बढ़ता हुआ अर्धचंद्र (Waxing Crescent)
- पहली तिमाही (First Quarter)
- शुक्ल गिब्बस (Waxing Gibbous)
- पूर्णिमा (Full Moon)
- कृष्ण पक्ष घटता हुआ गिब्बस (Waning Gibbous)
- तीसरी तिमाही (Third Quarter)
- घटता हुआ अर्धचंद्र (Waning Crescent)
चंद्रमा पर एक दिन कितना लंबा होता है?
चंद्रमा का अपना अक्ष पर घूर्णन (rotation) और पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा (revolution) का समय लगभग समान है – 27 दिन 7 घंटे (लगभग 27.3 दिन)। इसे साइडेरियल महीना कहते हैं।
इसलिए चंद्रमा पर एक पूरा दिन-रात (एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक) पृथ्वी के लगभग 29.5 दिनों के बराबर होता है – यानी लगभग 14-15 दिन की रोशनी और 14-15 दिन की अंधेरी रात।
चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण और अन्य विशेषताएँ
- पृथ्वी की तुलना में गुरुत्वाकर्षण 1/6 है। इसलिए 60 किलो का व्यक्ति चंद्रमा पर केवल 10 किलो महसूस करेगा।
- इस कम गुरुत्वाकर्षण के कारण वहाँ न के बराबर वायुमंडल है।
- अक्ष पर झुकाव केवल 1.5 डिग्री है (पृथ्वी का 23.5 डिग्री)।
- उम्र: लगभग 4.5 अरब वर्ष
- आकार: पृथ्वी का 1/4
- तापमान: दिन में +127°C, रात में -173°C
पृथ्वी से कितना हिस्सा दिखता है?
चंद्रमा का घूर्णन और परिक्रमा समय समान होने से हमेशा एक ही हिस्सा पृथ्वी की ओर रहता है (Tidal locking)। सामान्यतः 50% दिखता है, लेकिन लिब्रेशन (डगमगाहट) के कारण अतिरिक्त 9% और दिख जाता है। कुल मिलाकर लगभग 59% हिस्सा कभी-न-कभी दिखाई देता है, जबकि 41% हमेशा छिपा रहता है।
चंद्रमा का पृथ्वी पर प्रभाव
सबसे प्रमुख प्रभाव है ज्वार-भाटा। चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति समुद्री जल को खींचती है, जिससे ज्वार आते हैं।
चंद्रमा पर मानव और भारत की यात्रा
1969 में अमेरिका के अपोलो 11 मिशन से नील आर्मस्ट्रांग पहले व्यक्ति बने जो चंद्रमा पर उतरे।
भारत की उपलब्धियाँ:
- चंद्रयान-1 (2008): सफल ऑर्बिटर मिशन
- चंद्रयान-2 (2019): ऑर्बिटर सफल, लैंडिंग असफल
- चंद्रयान-3 (2023): 23 अगस्त 2023 को सफल सॉफ्ट लैंडिंग। भारत चौथा देश जो चंद्रमा पर लैंडिंग कर सका और पहला देश जो दक्षिणी ध्रुव पर उतरा।