विषय-सूची (INDEX)
- 1. राजस्थान का अपवाह तंत्र और नदियाँ
- 2. राजस्थान की प्रमुख झीलें
- 3. जल संरक्षण की तकनीकें एवं विभिन्न बांध
- 4. राजस्थान की प्रमुख फसलें
1. राजस्थान का अपवाह तंत्र और नदियाँ
भाग-1: अपवाह तंत्र का वर्गीकरण एवं विशेषताएँ
1. अपवाह तंत्र का वर्गीकरण: राजस्थान के अपवाह तंत्र को संगम के आधार पर तीन भागों में बांटा जाता है:
- (i) अरब सागर की नदियाँ (17%)
- (ii) अन्तः प्रवाही नदियाँ (60%)
- (iii) बंगाल की खाड़ी की नदियाँ (23%)
2. अपवाह तंत्र की विशेषताएँ:
- राजस्थान का अपवाह तंत्र मुख्यतः मानसून पर आधारित है।
- देश की सर्वाधिक अन्तः प्रवाही नदियाँ राजस्थान में पाई जाती है क्योंकि यहाँ मरुस्थल का विस्तार सर्वाधिक है।
- अरावली को राजस्थान की जलविभाजक रेखा कहा जाता है क्योंकि यह अपवाह तंत्र को दो भागों में बांटती है (अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी)।
- देश के कुल सतही जल एवं नदी जल में राजस्थान का योगदान 1.16% है।
राजस्थान के अपवाह तंत्र में मुख्य नदी बेसिन = 15, उपबेसिन = 58
भाग-2: अरब सागरीय नदियाँ (लूनी एवं पश्चिमी बनास)
अरब सागरीय नदियाँ मुख्यतः चार हैं: (i) लूनी नदी (ii) प. बनास नदी (iii) साबरमती नदी (iv) माही नदी
1. लूनी नदी
- उद्गमः नाग हिल्स (अजमेर)
- संगमः कच्छ का रन (गुजरात)
- लम्बाई: 495 किमी (राजस्थान में लम्बाई 330 किमी)
- अपवाह क्षेत्रः अजमेर, पाली, नागौर, ब्यावर, बाड़मेर, बालोतरा, जालोर, जोधपुर
- सहायक नदियाँः सुकड़ी, बांडी, खारी, जोजड़ी, गुहिया, जवाई, सागी, मिठड़ी, लीलड़ी
जोजड़ी नदीः लूनी की एकमात्र सहायक नदी जो दायीं ओर से आती है और एकमात्र सहायक नदी जो अरावली से उद्गमित नहीं होती।
| सहायक नदियाँ | उद्गम | संगम |
|---|---|---|
| 1. जोजड़ी | पोन्डलू (नागौर) | खेजड़ली खुर्द |
| 2. बांडी | फुलाद (पाली) | जोधपुर (लाखर) |
| 3. सुकड़ी | देसूरी (पाली) | समदड़ी (बालोतरा) |
| 4. मीठड़ी | पाली | मंगला गाँव (बालोतरा) |
| 5. जवाई | बाली-गोरिया गाँव (पाली) | गाँव (बाड़मेर) |
| 6. सागी | जसवन्तपुरा पहाड़ी (जालौर) | गाँधव गाँव (बाड़मेर) |
| 7. खारी | शेरगाँव पहाड़ी (सिरोही) | सायला गाँव (जालौर) |
- लूनी की विशेषताएँ (अन्य नाम): सागरमती, लवणती, आधी मीठी-आधी खारी, अन्तः सलीला (कालीदास के अनुसार)
- रेल/नाड़ा: Luni के अपवाह क्षेत्र को जालोर-सांचौर में रेल/नाड़ा कहते है।
- राजस्थान के कुल अपवाह तंत्र में लूनी नदी का योगदान 10.40 प्रतिशत है।
- लूनी नदी देश में मरुस्थल की सबसे लम्बी नदी है।
बाँध परियोजनाः
- 1. जसवन्त सागर / पिचिआक बाँध → जोधपुर → लूनी नदी
- 2. हेमावास बाँध → पाली → बांडी नदी
- 3. जवाई बाँध → सुमेरपुर (पाली) → जवाई नदी
- 4. बांकली बाँध → जालोर → सुकड़ी नदी
जवाई बाँध - सुमेरपुर (पाली):
- यह पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है। इसे 'मारवाड़ का अमृत सरोवर' कहते है।
- जलापूर्तिः पाली, जोधपुर, सिरोही, जालौर। जब जवाई बाँध में पानी की कमी होती है तो जलापूर्ति सेई जल सुरंग (उदयपुर से पाली) से की जाती है।
2. पश्चिमी बनास नदी
- उद्गमः नया सानवरा हिल्स (सिरोही)
- संगमः लिटिल कच्छ (गुजरात)
- लम्बाई: 266 किमी (राजस्थान में 50 किमी)
- अपवाह क्षेत्रः राजस्थान, गुजरात
- सहायक नदियाँः सुकली / सीपू, कुकड़ी
भाग-3: अरब सागरीय नदियाँ (साबरमती एवं माही)
1. साबरमती नदी
- उद्गमः पदराना हिल्स (उदयपुर)
- संगमः खम्भात की खाड़ी
- लम्बाई: 416 किमी (राजस्थान में लम्बाई - 45 किमी)
- अपवाह क्षेत्रः मुख्यतः उदयपुर एवं डूंगरपुर
- सहायक नदियाँ: वैतरक, सेई, मेश्वा, hथमती, हरनव, वाकल, मानसी, माजम
- विशेषताएँ (जल सुरंगे):
- (i) सेई जल सुरंगः जवाई बाँध में जलापूर्ति (उदयपुर से पाली), राज. की प्रथम जल सुरंग।
- (ii) मानसी-वाकल जल सुरंगः देवास परियोजना / मोहनलाल सुखाड़िया परियोजना में जलापूर्ति, राज. की सबसे लम्बी जल सुरंग (11 किमी)।
- साबरमती, राजस्थान की प्रथम नदी है जिस पर 'रिवर फ्रंट' (अहमदाबाद, गुजरात) बनाया गया।
2. माही नदी
- उद्गमः मेहंद झील [मिंडा, जिला-धार (M.P)] अमरेरू हिल्स (विन्ध्यन पर्वत श्रेणी)
- संगमः खम्भात की खाड़ी (गुजरात)
- लम्बाई: 576 किमी (राजस्थान में लम्बाई = 171 किमी)
- अपवाह क्षेत्रः बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ (वागड मैदान)
- माही नदी राजस्थान में खान्दू (बांसवाड़ा) से प्रवेश करती है।
- सहायक नदियाँः ईरू/एराव (प्रतापगढ़), अनास (M.P), चाप (बाँसवाड़ा), मोरेन (डूंगरपुर), सोम (उदयपुर), जाखम (प्रतापगढ़)
| सहायक नदियाँ | उद्गम | संगम |
|---|---|---|
| सोम | बीछामेड़ा पहाड़ियाँ (उदयपुर) | बेणेश्वर (डूंगरपुर) में माही में |
| जाखम | भँवरमाता पहाड़ियाँ (छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़) | बेणेश्वर के निकट सोम में |
| अनास | आम्बेर गाँव (मध्यप्रदेश) | डूंगरपुर में माही नदी में |
| मोरेन | डूंगरपुर | गलियाकोट के निकट माही मे |
| चाप | कालिंजरा पहाड़ी (बाँसवाड़ा) | डूंगरपुर में माही में |
- उपनाम: वागड की गंगा, आदिवासियों की गंगा, कांठल की गंगा, द. राजस्थान की स्वर्ण रेखा।
- माही की विशेषताएँ:
- (i) त्रिवेणी संगमः बेणेश्वर धाम (नवा टापरा, डूंगरपुर) → सोम + माही + जाखम का संगम। (माघ पूर्णिमा को यहाँ मेले का आयोजन होता है जिसे 'आदिवासियों का कुंभ' कहा जाता है)
- (ii) माही विश्व की एकमात्र ऐसी नदी है जो कर्क रेखा को दो बार काटती है। (कर्क रेखा - माही, भूमध्य रेखा - कांगो, मकर रेखा - लिम्पोपो)
- माही नदी के क्षेत्र में (बांसवाड़ा चाचाकोटा) टापुओं की संख्या अधिक पाई जाती है। इस कारण बांसवाड़ा को 'सौ टापूओं का शहर' कहा जाता है।
- माही राजस्थान की एकमात्र नदी है जो दक्षिण से प्रवेश कर अन्त में पश्चिम की ओर बहती है।
बाँध परियोजनाः
- (i) Mahi बजाज सागर बाँध → बांसवाड़ा (स्थिति: बोरखेड़ा। यह राजस्थान का सबसे लम्बा बाँध है तथा आदिवासी क्षेत्र में सबसे बड़ा बाँध है। कुल लम्बाई = 3109 मीटर)
- (ii) कागदी पिकअप → बांसवाड़ा
- (iii) कडाना वाटर बैंक → डूंगरपुर
- (iv) कडाना बाँध → गुजरात
- (v) सोम-कागदर परियोजना → उदयपुर
- (vi) सोम-कमला परियोजना → डूंगरपुर
- (vii) जाखम बाँध → प्रतापगढ़ (स्थिति: सीतामाता अभयारण्य। यह राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध है। कुल ऊँचाई 81 मीटर है)
भाग-4: अन्तः प्रवाही नदियाँ
प्रमुख नदियाँ: 1. घग्घर नदी 2. कांतली/काठली नदी 3. साबी नदी 4. बाणगंगा नदी 5. रुपारेल नदी 6. कांकनी/कांकनेय (मसूरदी) नदी
1. घग्घर नदी
- उद्गमः शिवालिक पहाड़ी (H.P) से होकर तलवाड़ा (हनुमानगढ़) से राजस्थान में प्रवेश। फोर्ट अब्बास (पाकिस्तान) तक।
- अपवाह क्षेत्रः हनुमानगढ़, श्री गंगानगर (हनुमानगढ़ में इसके निकट भटनेर दुर्ग स्थित है)
- विशेषताएँ:
- (i) उपनाम - सरस्वती नदी (प्राचीन नाम), मृत नदी, नट, सोता नदी, दृषद्वती नदी
- (ii) घग्घर के अपवाह क्षेत्र को हनुमानगढ़ में 'नाली/पाट' और पाकिस्तान में 'हकरा' कहते है।
- (iii) घग्घर हिमालय से राजस्थान में आने वाली एकमात्र नदी है।
- (iv) घग्घर नदी देश/राजस्थान की सबसे लम्बी अन्तः प्रवाही नदी है। (जबकि राजस्थान 'में' सबसे लम्बी अन्तः प्रवाही नदी - कांतली है)
- (v) फोर्ट अब्बास घग्घर का अंतिम स्थान है जो पाकिस्तान में स्थित है।
- (vi) यह बीकानेर सम्भाग की एकमात्र नदी है।
2. कांतली नदी
- उद्गमः खण्डेला पहाड़ी (सीकर)
- अपवाह क्षेत्रः तोरावाटी (सीकर, झुंझुनूं)
- विशेषता: कांतली नदी- राजस्थान 'में' सबसे लम्बी अन्तः प्रवाही नदी है जिसकी कुल लम्बाई 100 किमी है। गणेश्वर सभ्यता (सीकर) एवं सुनारी सभ्यता (झुंझुनूं) इसी के किनारे स्थित है।
3. साबी/साहिबी नदी (नफजगढ़ का नाला)
- उद्गमः सेवर की पहाड़ियाँ (कोटपुतली-बहरोड़)
- अपवाह क्षेत्रः पहले जयपुर एवं अलवर। वर्तमान- कोटपुतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा
- विशेषताएँ: साबी राजस्थान की एकमात्र नदी है जो हरियाणा के गुड़गांव मैदान में समाप्त होती है। जोधपुरा सभ्यता इसी के किनारे स्थित है।
4. बाणगंगा नदी
- उद्गमः बैराठ हिल्स (कोटपुतली बहरोड़)
- अपवाह क्षेत्रः कोटपुतली बहरोड़, जयपुर, दौसा, भरतपुर
- विशेषताएँ: उपनाम → अर्जुन की गंगा, ताला नदी, रुण्डित नदी। (रुण्डित नदी- वे सहायक नदियाँ जो मुख्य नदी में गिरने से पहले समाप्त हो जाती है)। 2012 से इसे अन्तः प्रवाही नदी में शामिल किया जाता है।
- बाँध परियोजनाएँ:
- (i) रामगढ़ परियोजना → इसे ईसरदा बाँध (सवाई माधोपुर) से जलापूर्ति की जाएगी।
- (ii) केवलादेव (अजान बाँध) → पाँचना बाँध (गम्भीरी नदी, करौली) व यमुना लिंक नहर से जलापूर्ति की जाती है।
5. रुपारेल / वराह / लासवरी नदी
- उद्गमः उदयनाथ हिल्स (अलवर)
- अपवाह क्षेत्रः अलवर, डीग, भरतपुर
- विशेषताएँ: सीकरी बाँध रूपारेल नदी पर डीग में स्थित है। मोती झील (भरतपुर की जीवनरेखा) इसी नदी पर निर्मित मीठे पानी की झील है। इसमें नील हरित शैवाल अधिक पाए जाते है। सुजानगंगा एक लिंक चैनल है जो मोतीझील एवं लोहागढ़ को जोड़ता है।
6. कांकनी नदी / काकनेय / मसूरदी
- उद्गमः कोटड़ी गाँव (जैसलमेर), बुझ झील (जैसलमेर) में विलीन।
- विशेषता: राजस्थान की सबसे छोटी नदी कांकनी नदी (27 किमी) है।
7. अन्य अन्तः प्रवाही नदियाँ
- खारी, खंडेला नदी (सीकर), मेंथा नदी (मनोहर हिल्स, जयपुर), रूपनगढ़ (अजमेर), तुरंतमती। ये सभी सांभर झील में गिरती हैं।
भाग-5: बंगाल की खाड़ी की नदियाँ
1. चम्बल नदी
- उद्गमः जानापाव हिल्स (महू, विन्ध्यन पर्वतमाला, M.P.)
- संगमः यमुना (इटावा- U.P).
- लम्बाई: 1051 किमी (राजस्थान में = 322 किमी) [पुराने डाटा के अनुसार 966 किमी, राजस्थान में 135 किमी].
- अपवाह क्षेत्रः चित्तौड़गढ़ (प्रवेश चौरासीगढ़ से), हाड़ौती (कोटा, बूंदी), डांग क्षेत्र (सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर).
| सहायक नदी | उद्गम | संगम |
|---|---|---|
| कालीसिंध | देवास (मध्यप्रदेश) | नौनेरा-चम्बल नदी (कोटा) |
| आहू | मालवा (मध्यप्रदेश) | झालावाड़ (कालीसिंध में) |
| परवन | सीहोर (मध्यप्रदेश) | झालावाड़ (कालीसिंध में) |
| पार्वती | M.P (विन्ध्यन पर्वत श्रृंखला) | चम्बल (पालिया-सवाई माधोपुर) |
| कूनु | शिवपुरी पठार (मध्यप्रदेश) | चम्बल - करौली |
| सीप | श्योपुर (मध्यप्रदेश) | चम्बल (रामेश्वर, सवाई माधोपुर) |
| ब्राह्मणी | चित्तौड़गढ़ (हरिपुर गाँव) | चम्बल (भैंसरोडगढ़) |
| मेज | भीलवाड़ा (माण्डलगढ़) | चम्बल (लाखेरी, बूंदी) |
| मांगली | भीलवाड़ा | मेज नदी (बूंदी) |
| गुंजाली | नीमच (मध्यप्रदेश) | चम्बल (अरनिया, कोटा) |
| चाकण | बूंदी | चम्बल (करणपुरा गाँव, स.मा.) |
| बनास | खमनौर (राजसमंद) | चम्बल (पादरला गाँव, स.मा.) |
2. कालीसिंध चम्बल में दायीं ओर से मिलने वाली सबसे लम्बी सहायक नदी है.
सामेलाः कालीसिंध एवं आहू नदियों के संगम को सामेला कहा जाता है। सर्वश्रेष्ठ जल दुर्ग (गागरोन) इसी के किनारे है।
- उपनाम: चर्मण्वती (प्राचीन नाम), कामधेनू, बारहमासी.
- त्रिवेणी संगमः रामेश्वर घाट (पदरा गाँव सवाई माधोपुर) → चम्बल + बनास + सीप.
- संरक्षित जीवः घड़ियाल, मगरमच्छ, गांगेय डॉल्फिन, उद्विलाव। इसे घड़ियालों की शरण स्थली कहा जाता है।
- चूलिया जलप्रपातः भैंसरोडगढ़ (चित्तौड़गढ़) में चम्बल नदी पर स्थित है। यह राजस्थान का सबसे ऊँचा जलप्रपात है (18 मीटर)।
- हैंगिंग ब्रिजः राजस्थान का प्रथम हैंगिंग ब्रिज चम्बल नदी पर कोटा में स्थित है (लम्बाई 1.5 किमी)। [दूसरा: माही नदी, बांसवाड़ा]
- हैरिटेज रिवर फ्रंट: कोटा में चम्बल नदी पर बना, जो राज्य का प्रथम रिवर फ्रंट है।
- चम्बल राजस्थान की सबसे लम्बी, सबसे बड़ी और सर्वाधिक अन्तर्राज्यीय सीमा बनाने वाली नदी है। यहाँ सर्वाधिक गॉर्ज वैली (V-आकार की घाटी) पाई जाती है।
- बाँध परियोजनाएँ: 1. गाँधी सागर (M.P.), 2. राणा प्रताप सागर (चित्तौड़गढ़), 3. जवाहर सागर (कोटा-बूंदी), 4. कोटा बैराज (कोटा)।
2. बनास नदी
- उद्गमः खमनौर हिल्स (राजसमंद)
- संगमः चम्बल (रामेश्वर घाट - सवाई माधोपुर)
- लम्बाई: 512 किमी (पुरानी लम्बाई 480 किमी)
- अपवाह क्षेत्रः मेवाड़ मैदान (राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, Udaipur), मालपुरा-करौली मैदान (अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर).
| सहायक नदी | उद्गम | संगम |
|---|---|---|
| कोठारी | दिवेर पहाड़ी, राजसमंद | बनास (भीलवाड़ा) |
| खारी | बिजराल पहाड़ी, राजसमंद | बनास (राजमहल टोंक) |
| डाई | अजमेर | बनास (राजमहल टोंक) |
| मोरेल | बस्सी जयपुर | बनास (सवाई माधोपुर) |
| माशी | सिलोरा, किशनगढ़, अजमेर | बनास (जोधपुरिया टोंक) |
| बांडी | जयपुर, सामोद | बनास (जोधपुरिया टोंक) |
| कालीसिल | करौली-सवाई माधोपुर | मोरेल-बनास, टोंक |
| सोहदरा/सहोदर | अराई पहाड़ी अजमेर | बनास (टोंक) |
| बेड़च | गोगुन्दा हिल्स उदयपुर | बिगोद, भीलवाड़ा |
| मेनाल | चित्तौड़गढ़-भीलवाड़ा | बिगोद, भीलवाड़ा |
| गलवा | टोंक | उनियारा, टोंक |
- उपनाम: वनों की आशा, वर्णाशा, वशिष्ठी.
- त्रिवेणी संगम: सर्वाधिक त्रिवेणी संगम बनास पर हैं:
- बिगोद (भीलवाड़ा) - (बनास, बेड़च, मेनाल)
- राजमहल (टोंक) - (बनास, खारी, डाई)
- जोधपुरिया (टोंक) - (बनास, बांडी, माशी)
- रामेश्वर घाट (स. माधोपुर) - (बनास, चम्बल, सीप)
- केवल/पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी बनास नदी है।
- बाँध परियोजनाएँ:
- नंदसमंद (राजसमंद)
- मातृकुंडिया (चित्तौड़)
- बीसलपुर (टोंक) - यह राजस्थान का सबसे बड़ा कंक्रीट बाँध एवं सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है। पर्यटन विभाग ने इसे 'मिनि गोवा' का दर्जा दिया है। यहाँ फिश एक्वेरियम स्थित है और यह राज्य का प्रथम कंजर्वेशन रिजर्व (2008) है।
- ईसरदा (स.माधोपुर)
- मोरेल बाँध → मोरेल नदी → सवाई माधोपुर, दौसा
- मेजा बाँध → कोठारी नदी → भीलवाड़ा
- गलवा बाँध → गलवा नदी → टोंक
- नेवटा बाँध → बांडी नदी → जयपुर
- लसाड़िया बाँध → डाई नदी → अजमेर
3. बेड़च नदी
- उद्गमः गोगुन्दा हिल्स, उदयपुर
- संगमः बनास (बिगोद, भीलवाड़ा)
- विशेषताएँ: उदयसागर झील में गिरने से पहले यह 'आयड़ नदी' कहलाती है, गिरने के बाद 'बेड़च' कहलाती है। चित्तौड़ दुर्ग बेड़च एवं गम्भीरी नदी के किनारे स्थित है।
4. गम्भीर नदी / ऊंटगन नदी
- उद्गमः सपोटरा तहसील (करौली), संगमः यमुना (मैनपुरी, UP), लम्बाई: 288 किमी.
- सहायक नदियाँः अटा, माची, भद्रावती, भैंसावट, बरखेड़ा
- पाँचना बाँध (करौली): यह राजस्थान का मिट्टी से निर्मित सबसे बड़ा बाँध है।
भाग-6: अपवाह तंत्र से सम्बन्धित अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
1. नदियों की संख्या: सर्वाधिक नदियाँ जिला चित्तौड़गढ़ और सम्भाग कोटा में हैं। न्यूनतम नदियाँ जिला बीकानेर व चुरु और सम्भाग बीकानेर में हैं।
2. राजस्थान की लम्बी नदियाँ: उत्तरी राजस्थान की घग्घर, पश्चिमी राजस्थान की लूनी, दक्षिणी राजस्थान की माही, पूर्वी राजस्थान/सम्पूर्ण राजस्थान की चम्बल। पूर्णतः राजस्थान में सबसे लम्बी नदी बनास है।
3. लम्बाई के अनुसार क्रम:
- कुल लम्बाई का क्रम: चम्बल (1051 किमी) > माही (576 किमी) > बनास (512 किमी) > लूनी (495 किमी)
- राजस्थान 'में' लम्बाई का क्रम: बनास (512 किमी) > लूनी (330 किमी) > चम्बल (322 किमी) > माही (171 किमी)
4. अपवाह क्षेत्र के अनुसार क्रम (अवरोही): 1. बनास (45000 किमी²) > 2. लूनी (37000 किमी²) > 3. चम्बल (32000 किमी²) > 4. माही (16000 किमी²) > 5. बाणगंगा (8800 किमी²) > 6. साबरमती (4000 किमी²)
5. उपबेसिन के अनुसार क्रम: (i) लूनी = 12, (ii) बनास = 10, (iii) चम्बल = 7/8, (iv) माही = 6
6. जल उपलब्धता के आधार पर क्रम: चम्बल > बनास > माही
7. नदियों के किनारे स्थित प्रमुख शहर:
- घग्घर: हनुमानगढ़, सूरतगढ़, अनूपगढ़
- लूनी: बालोतरा | सुकड़ी: जालौर | जवाई: सुमेरपुर (पाली)
- खारी: गुलाबपुरा, आसीन्द, विजयनगर | बनास: नाथद्वारा, टोंक
- बेड़च-गम्भीरी: चित्तौड़गढ़ | चम्बल: कोटा | कालीसिंध: झालावाड़
8. राजस्थान के प्रमुख जलप्रपात:
- दमोह जलप्रपात (बांडी, धौलपुर) | अरणा जलप्रपात (जोधपुर, शुष्क) | भीलवेरी जलप्रपात (पाली)
- घुघिया जलप्रपात (माउण्ट आबू) | चूलिया जलप्रपात (चम्बल, भैंसरोडगढ़) | पाड़ाझार (भैंसरोडगढ़)
- गैपरनाथ (कोटा) | भीमलत (मांगली नदी, बूंदी) | मेनाल (मेनाल नदी, चित्तौड़गढ़-भीलवाड़ा)
9. कन्फ्यूजिंग पेयर (सहायक नदियाँ):
- सागी → लूनी | साबी → अन्तः प्रवाह
- सुकड़ी → लूनी | सुकली → प. बनास
- सीपू → प. बनास | सीप → चम्बल
- प. बनास → अरब सागर | बनास → बंगाल की खाड़ी
- मोरेन → माही | मोरेल → बनास
- पार्वती → चम्बल | पार्बती → गम्भीर
- गंभीर → यमुना | गंभीरी → बेड़च
- कांतली → तोरावाटी | कांकनी → जैसलमेर (मसूरदी)
- रूपारेल → अलवर से भरतपुर | रूपनगढ़ → सांभर झील
- बांडी → लूनी (पाली) | बांडी → बनास (अजमेर)
- माशी → बनास | मानसी-वाकल → साबरमती
- कालीसिंध → चम्बल | कालीसिल → बनास (मोरेल)
2. राजस्थान की झीलें
पानी की प्रकृति के आधार पर राजस्थान की झीलों को दो भागों में बाँटा गया है:
- I. खारे पानी की झीलें: कारण- टेथिस सागर के अवशेष। सर्वाधिक डीडवाना-कुचामन व नागौर में।
- II. मीठे पानी की झीलें: कारण- वर्षा जल/नदी जल पर आधारित। सर्वाधिक उदयपुर में।
I. खारे पानी की झीलें
उत्तर-पश्चिम में माईकाशिष्ट चट्टानों के कारण यहाँ खारे पानी की झीलें अधिक हैं (केशिकात्व प्रक्रिया द्वारा NaCl का निर्माण)।
| झील | स्थान | झील | स्थान |
|---|---|---|---|
| सांभर | जयपुर | रेवासा | सीकर |
| पचपदरा | बालोतरा | काछोर | सीकर |
| डीडवाना | डीडवाना-कुचामन | लूणकरणसर | बीकानेर |
| कुचामन | डीडवाना-कुचामन | फलौदी | फलौदी |
| नावां | डीडवाना-कुचामन | कावोद / काणोद | जैसलमेर |
| डेगाना | नागौर् | सुजानगढ़ | चूरू |
1. सांभर झील (जयपुर)
- निर्माता: वासुदेव चौहान (बिजौलिया शिलालेख के अनुसार)।
- यह पाँच नदियों से मिलकर बनी है: मेंथा (सर्वाधिक लवणता), रूपनगढ़, खारी, तुरंतमति, खंडेल।
- यह देश की सबसे बड़ी अन्तः स्थलीय खारे पानी की झील है। यहाँ से भारत का 8.7% व राजस्थान का 80-90% नमक उत्पादित होता है।
- केन्द्र सरकार (60% HSL) व राज्य सरकार (40% SSL) का संयुक्त उपक्रम है। उत्पादित नमक को क्यार कहते हैं।
- यह 1990 से रामसर साईट सूची में शामिल है। हाल ही में (2019, 2025) यह एवियन बोटुलिज्म बीमारी के कारण कुर्जा पक्षियों की मृत्यु को लेकर चर्चा में रही।
2. पचपदरा झील (बालोतरा)
- यहाँ छोटे कुएँ 'कोसिया' और नमक 'रेस्ता' कहलाता है। यहाँ का नमक सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि इसमें NaCl 98% होता है।
- खारवाल जाति मोरली झाड़ी के उपयोग से यहाँ नमक उत्पादन का कार्य करती है।
3. डीडवाना झील (डीडवाना कुचामन)
- यहाँ निम्न श्रेणी का नमक उत्पादन होता है क्योंकि NaCl के स्थान पर सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) पाया जाता है।
- यहाँ 'राजस्थान स्टेट कैमिकल वर्क्स' (1964) स्थापित है। इसका उपयोग काँच, कागज व चमड़ा उद्योग में होता है।
II. मीठे पानी की झीलें
1. जयसमंद झील या ढेबर झील (सलूम्बर)
- निर्माता महाराणा जयसिंह (1685-1691 ई.), गोमती नदी पर स्थित मीठे पानी की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है।
- इसमें 7 टापू हैं; सबसे बड़ा 'बाबा का मगरा' व सबसे छोटा 'प्यारी' है। यहाँ भील-मीणा जनजाति निवास करती है।
- यहाँ से सिंचाई हेतु श्यामपुरा व भाट नहरें निकाली गई हैं। इसे "जलचरों की बस्ती" भी कहा जाता है।
2. पिछोला झील (उदयपुर)
- निर्माण राणा लाखा के काल में बन्जारे द्वारा (1388 ई.)। नदियाँ: सीसारमा व बूझड़ा।
- यहाँ नटनी का चबूतरा स्थित है। राज्य की प्रथम सौर नाव व इलेक्ट्रिक नाव यहीं चलाई गई।
- ऐतिहासिक धरोहरें: जगमन्दिर, जगनिवास (वर्तमान में होटल लेक पैलेस) व उदयपुर सिटी पैलेस। शाहजहाँ ने अपने विद्रोह के समय यहीं शरण ली थी। स्वरूप सागर चैनल इसे फतेहसागर से जोड़ता है।
3. फतेहसागर झील / देवाली तालाब
- निर्माता जयसिंह (1688 ई.), पुनर्गठन फतेहसिंह (1888 ई.) द्वारा। इसके मध्य नेहरू उद्यान, सौर वेधशाला और वर्चुअल फिश एक्वेरियम स्थित हैं। पानी कम होने पर मदार बाँध से जलापूर्ति होती है। इसके निकट मोती मगरी पहाड़ी है।
4. अन्य महत्वपूर्ण मीठे पानी की झीलें:
- रंग सागर / अमरकूट (उदयपुर): पिछोला एवं स्वरूप सागर से जुड़ी है।
- बड़ी झील / जियान सागर (उदयपुर): निकट बाहुबली पहाड़ी है। महासीर मछली पाई जाती है।
- उदयसागर (उदयपुर): महाराणा उदयसिंह द्वारा निर्मित। आयड़ नदी इसमें गिरने के बाद बेड़च कहलाती है।
- नक्की झील (सिरोही): यह एक क्रेटर/ज्वालामुखी झील है। राज्य की सबसे ऊँची (1200मी) व गहरी (35मी) झील है। गरासिया जनजाति इसमें अस्थि विसर्जन करती है। यहाँ टॉड रॉक, नन रॉक, नन्दी रॉक स्थित हैं।
- राजसमंद झील: निर्माता राजसिंह। गोमती नदी पर निर्मित। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय 6 वर्षों तक 'इम्पीरियल एयरवेज' द्वारा इसे सी-प्लेन बेस के रूप में उपयोग किया गया। यहाँ नौ चौकी पाल पर 'राजप्रशस्ति' (25 शिलालेख) स्थित है। यह राज्य की प्रथम अकाल राहत झील है।
- पुष्कर झील (अजमेर): क्रेटर झील। इसे पाँचवां तीर्थ, तीर्थराज, 52 घाटा झील भी कहते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को यहाँ 'राजस्थान का रंगीला मेला' लगता है और दीपदान होता है। यह सबसे बड़ी प्राकृतिक मीठे पानी की झील है।
- आनासागर झील (अजमेर): निर्माता अर्णोराज (1136-37 ई.)। इसमें अक्टूबर 2024 में देश का प्रथम "इलेक्ट्रिक क्रूज" चलाया गया। यहाँ दौलतबाग व बारहदरी स्थित हैं।
- फॉय सागर / वरुण सागर (अजमेर): इंजीनियर फॉय द्वारा निर्मित राज्य की दूसरी अकाल राहत झील।
- मानसागर झील (जयपुर): सर्वाधिक प्रदूषित झील, जिसमें जलमहल स्थित है। द्रव्यवती नदी यहीं से निकलती है।
- सिलीसेढ़ झील (अलवर): इसे 'राजस्थान का नन्दन कानन' कहा जाता है। स्वर्णिम त्रिकोण पर स्थित है। इसे 12 दिसम्बर, 2025 को राज्य की 5वीं और देश की 96वीं रामसर साइट का दर्जा दिया गया।
- कायलाना झील (जोधपुर): IGNP (राजीव गाँधी लिफ्ट नहर) से जुड़ने वाली पहली झील है। जोधपुर को पेयजलापूर्ति करती है। इसके निकट माचिया सफारी पार्क है।
- कोलायत झील (बीकानेर): कपिल मुनि का आश्रम है। कार्तिक पूर्णिमा को मेला व दीपदान होता है। चारण जाति यहाँ नहीं जाती।
- गजनेर झील (बीकानेर): महाराजा गंगासिंह द्वारा निर्मित, इसे 'पानी का शुद्ध दर्पण' कहा जाता है।
- रामगढ़ झील (बारां): उल्कापिंड/क्रेटर झील। यूनेस्को ने 2024 में इसे भू-विरासत स्थल सूची में शामिल किया।
- नवल सागर (बूंदी): इसके मध्य आधा जल में डूबा वरुण देवता का मन्दिर स्थित है।
III. झीलों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
| झील का नाम | स्थान / जिला | झील का नाम | स्थान / जिला |
|---|---|---|---|
| बालसमंद, रानीसर, पदमसर | जोधपुर | सरदार समंद | पाली |
| नन्द समंद (Life line) | राजसमंद | जयसमंद बाँध | अलवर |
| अनूपसागर, सूरसागर | बीकानेर | तलवाड़ा झील | हनुमानगढ़ |
| तालाबशाही, रामसागर | धौलपुर | आनन्द सागर, डायलाब | बांसवाड़ा |
| बुझ, गढ़ीसर, अमर सागर | जैसलमेर | मानसरोवर बाँध | सवाई माधोपुर |
| किशोर सागर | कोटा | एडवर्ड सागर, गैप सागर | डूंगरपुर |
| कनक सागर, जैत सागर | बूंदी | मानसरोवर / काडला झील | झालावाड़ |
2. राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना (NLCP): शुरुआत 2001 (पुनः 1 अप्रैल 2016)। वित्तीय सहयोग केन्द्र:राज्य = 60:40 है। इसमें राजस्थान की 6 झीलें शामिल हैं: (i) मानसागर, (ii) पुष्कर, (iii) आनासागर, (iv) पिछोला, (v) फतेहसागर, (vi) नक्की झील।
नलकूप/कुएँ: चाँदन नलकूप (जैसलमेर) - 'थार का घड़ा' | बाटाडू कुआँ (बाड़मेर) - 'रेगिस्तान का जलमहल' (मार्बल निर्मित)।
3. जल संरक्षण तकनीकें एवं विभिन्न बांध
I. जल संरक्षण तकनीकें
परम्परागत तकनीकें:
- खड़ीन: 15वीं शताब्दी में जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा विकसित ढालनुमा कृत्रिम कृषि व जल संचयन तकनीक। इसकी पाल को 'धोरा' कहते हैं।
- नाड़ी: वर्षा जल एकत्र करने की प्राकृतिक विधि (नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर में प्रसिद्ध)। इसके जलग्रहण क्षेत्र को 'आगोर' कहते हैं।
- टोबा: नाड़ी को कृत्रिम रूप से अधिक गहरा किया गया रूप।
- जोहड़: शेखावाटी में वर्षा जल संचयन हेतु कच्चे कुएँ। इसे पुनर्जीवित करने का श्रेय राजेन्द्र सिंह (जोहड़ वाले बाबा, रैमन मैग्सेसे अवार्ड विजेता) को जाता है।
- कुंड व टांका: पक्का निर्मित टैंक, जिसके चारों ओर का ढालनुमा फर्श 'पाइतन/पाड़तान' कहलाता है।
- बेरी: तालाब या झील के पास बनाई जाने वाली संकड़ी कुई।
- बावड़ी: सीढ़ीदार चतुष्कोणीय जलस्रोत। बूंदी को 'सिटी ऑफ स्टैप वेल्स' कहते हैं।
- झालरा: बावड़ी जैसी आकृति, परन्तु इसका जल केवल धार्मिक व सामूहिक कार्यों हेतु प्रयुक्त होता है (जैसे- तूर जी का झालरा, जोधपुर)।
- नेहट/नेहटा: अतिरिक्त जल संचय हेतु छोटा गर्तनुमा भाग। पालर-पानी: वर्षा के शुद्ध जल को कहते हैं।
आधुनिक तकनीकें: रूफ टॉप जल संचयन, वाटर हार्वेस्टिंग, बाँध परियोजनाएं, तथा नर्मदा नहर में अनिवार्य फव्वारा एवं बूंद-बूँद सिंचाई तकनीक (इजराइल के सहयोग से)।
II. जल संरक्षण नीतियाँ एवं योजनाएं
- राज्य जल संसाधन सूचना प्रणाली डैशबोर्ड: मार्च 2024 में इसे प्रारंभ करने वाला राजस्थान देश का प्रथम राज्य बना।
- अटल भूजल योजना: भारत सरकार व विश्व बैंक (50:50), 1 अप्रैल 2020 से मार्च 2025 तक, 16 जिलों के 38 ब्लॉक में।
- भू-जल आकलन 2023: राज्य का 78% क्षेत्र अतिदोहित है। दोहन दर 150% है। (सुरक्षित ब्लॉक: 38, अतिदोहित: 216)।
- मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0: प्रारंभ फरवरी 2024, 3500 करोड़ की लागत से।
- ERCP (पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक): इसके तहत 6 बैराज (कुन्नू, रामगढ़, महलपुर, नवनेरा, मेज, राठौड़) तथा 2 बाँध (डूंगरी, ईसरदा) प्रस्तावित हैं।
- स्कॉडा सिस्टम (SCADA): बीसलपुर, माही, गुढ़ा, जवाई, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर व छापी सहित कुल 7 बांधों पर स्थापित।
III. ज़िलेवार प्रमुख बाँध व ट्रिक्स
अन्य प्रमुख बांध तालिका:
| बाँध / डैम | नदी / जिला | बाँध / डैम | नदी / जिला |
|---|---|---|---|
| नारायण सागर | खारी (ब्यावर, अजमेर) | टोरडी सागर | सहोदरा (टोंक) |
| ओराई / गंभीरी बाँध | चित्तौड़गढ़ | माधोसागर / काला खोह | दौसा |
| बंध बारेठा / अजान बाँध | गंभीर (भरतपुर) | रामसागर / पार्वती बाँध | धौलपुर |
| कोट बाँध / अजित सागर | झुंझुनू | हेमावास बाँध | बाण्डी (पाली) |
| जसवंतसागर (पिचियाक) | लूनी (जोधपुर) | बाँकली बाँध | सूकड़ी (जालौर) |
| जाखम बांध | जाखम (प्रतापगढ़) | सोम-कमला-अम्बा | सोम (डूंगरपुर) |
4. राजस्थान की प्रमुख फसलें
कृषि को 'मानसून का जुआ' कहा जाता है। पूर्वी मैदान को कृषि का हृदयस्थल कहते हैं।
A. कृषि जलवायु प्रदेश
भारत में कुल 15 तथा राजस्थान में 10 कृषि जलवायु प्रदेश हैं:
| जोन Code | कृषि जलवायु प्रदेश का नाम | विस्तार (प्रमुख जिले) |
|---|---|---|
| IA | पश्चिमी शुष्क मैदान | जोधपुर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतरा |
| IB | उत्तरी-पश्चिमी सिंचित मैदान | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ |
| IC | अति शुष्क एवं आंशिक सिंचित मैदान | जैसलमेर, बीकानेर, चूरू |
| IIA | शेखावाटी अन्तः प्रवाह मैदान | सीकर, झुंझुनूं, नागौर, डीडवाना-कुचामन |
| IIB | लूनी अन्तः प्रवाही मैदान | पाली, जालोर, सांचौर, सिरोही |
| IIIA | अर्द्धशुष्क पूर्वी मैदान | अजमेर, जयपुर, दौसा, टोंक, खैरथल-तिजारा |
| IIIB | बाढ़ सम्भाव्य पूर्वी मैदान | अलवर, डीग, भरतपुर, करौली, धौलपुर, स. माधोपुर |
| IVA | उपाद्र दक्षिणी मैदान | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा |
| IVB | आर्द्र दक्षिणी मैदान | बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूम्बर |
| V | आर्द्र दक्षिणी-पूर्वी मैदान | कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ |
B. कृषि के प्रकार
सामान्य प्रकार:
- मिश्रित कृषि (कृषि + पशुपालन), बारानी कृषि (मानसून आधारित), शुष्क कृषि (75cm से कम वर्षा), आर्द्र कृषि (75cm से अधिक वर्षा)।
- कृषि सघनता: मोनोकल्चर (1 फसल/वर्ष), डयूओकल्चर (2 फसल), ओलिगोकल्चर (3 फसल), रिलेकल्चर (कटाई से पहले अगली फसल बोना)। एक कृषि वर्ष 1 जुलाई से 30 जून तक होता है।
- स्थानांतरित कृषि (वालरा): आदिवासियों द्वारा वनों को जलाकर की जाने वाली खेती। अरावली पर्वतीय क्षेत्र में इसे चिमाता तथा मैदानी क्षेत्र में दजिया कहते हैं। इसे 'पर्यावरण का दुश्मन' भी कहा जाता है।
C. ऋतुओं के आधार पर वर्गीकरण
- a. खरीफ / स्यालु (जून-जुलाई से सित.-अक्टू.): बाजरा, ज्वार, चावल, मक्का, मूंग, मोठ, चवला, तिल, सोयाबीन, मूँगफली, कपास, गन्ना, ग्वार।
- b. रबी / उनालू (अक्टू.-नव. से मार्च-अप्रैल): गेहूँ, जौ, मसूर, चना, मटर, सरसों, जीरा, सौंफ, लहसुन, तारामीरा, ईसबगोल, अफीम।
- c. जायद (मार्च से जून): तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, सब्जियां व हरा चारा।
D. भौगोलिक दशाएँ एवं वितरण
| फसल का नाम | वर्षा (सेमी.) | तापमान | मिट्टी |
|---|---|---|---|
| बाजरा | 25-50 सेमी. | 25°C - 35°C | रेतीली, जलोढ़ |
| जौ / गेहूँ / सरसों | 50-100 सेमी. | 15°C - 20°C | जलोढ़ |
| कпас | 50-100 सेमी. | 21°C - 28°C | काली |
| मक्का | 50-100 सेमी. | 21°C - 28°C | लाल चिकनी |
| गन्ना | 125-150 सेमी. | 21°C - 28°C | जलोढ़ |
| चावल | 150-200 सेमी. | 21°C - 28°C | जलोढ़ |
E. कृषि क्रांतियाँ एवं अनुसंधान केन्द्र
अनुसंधान केन्द्र (ICAR): CAZRI (जोधपुर, 1959) | केन्द्रीय शुष्क बागवानी (बीछवाल, बीकानेर, 1993) | राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केन्द्र (सेवर, भरतपुर, 1993) | राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र (तबीजी, अजमेर, 2000)।
राज्य सरकार के केन्द्र: RARI (दुर्गापुरा, जयपुर, 1943) | खजूर व बेर केन्द्र (बीछवाल) | बाजरा व ईसबगोल केन्द्र (जोधपुर) | मक्का व चावल अनुसंधान केन्द्र (बाँसवाड़ा)।
F. कृषि उत्कृष्टता केन्द्र (Centre of Excellence)
- खजूर: सगरा भोजका (जैसलमेर) | बाजरा: जोधपुर | अंजीर: सिरोही (प्रस्तावित) | सब्जी: बूँदी | अनार, ऑलिव, ड्रैगन फ्रूट: बस्सी (जयपुर)
- नींबू वर्गीय: झालावाड़ व नांता (कोटा) | सीताफल: चित्तौड़गढ़ | अमरुद: देवड़ावास (टोंक), सवाई माधोपुर | लहसून: बारां | प्याज: अलवर | किन्नू: श्री गंगानगर
G. कृषि उत्पादन आँकड़े एवं नीतियां
उत्पादन में प्रथम जिले (2022-23): बाजरा व मूँगफली (बाड़मेर/बीकानेर), जौ व कपास (गंगानगर), मक्का (भीलवाड़ा), गेहूँ व गन्ना (हनुमानगढ़/गंगानगर), चावल (बूंदी), सरसों (टोंक)।
देश में राजस्थान का स्थान व योगदान:
- 1st Position: ग्वार (88.80%), सरसों (43.43%), बाजरा (41.34%), कुल तिलहन (23.61%), मोटा अनाज (14.21%)।
- 2nd Position: मूँगफली (19.91%) | 3rd Position: चना (17.39%), कुल दलहन (13.76%), सोयाबीन (8.96%)।
उच्च गुणवत्ता वाली किस्में (HYV):
- बाजरा: RAJ-171, RCB-2, RHB-273 (Three-way संकर बाजरा किस्म)
- कपास: नरमा, बीकानेरी नरमा, वरलक्ष्मी | गेहूँ: मरु गेहूँ नबी (MG-नबी), कल्याण सोना, सोनालिका
- मक्का: माही धवल, माही कंचन | चावल: माही सुगन्धा, बासमती | सरसों: पूसा बोल्ड, राजविजय
आर्थिक समीक्षा तथ्य (2025-26):
- GSVA में कृषि योगदान: स्थिर कीमतों पर 25.33%, प्रचलित कीमतों पर 25.7% है।
- भू-उपयोग: शुद्ध बोया गया क्षेत्र 53.02%, कृषि योग्य बंजर भूमि 10.11%, वानिकी 8.30% है।
- महिला प्रचालित जोतों में 41.94% की वृद्धि हुई है (7.75 लाख)। औसत कृषि जोत आकार घटकर 2.73 हैक्टेयर रह गया है।
H. प्रमुख कृषि योजनाएं एवं करंट अफेयर्स
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (2016): प्रीमियम दर - रबी (1.5%), खरीफ (2%), वाणिज्यिक (5%)। 'मेरी पॉलिसी मेरे हाथ' अभियान फरवरी 2024 में चलाया गया।
- नमो ड्रोन दीदी योजना (30 नवम्बर 2023): SHGs महिलाओं को ड्रोन हेतु 80% (अधिकतम 8 लाख) सब्सिडी।
- प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY - 16 जुलाई 2025): 6 वर्षों के लिए, 100 निम्न उत्पादकता जिलों हेतु। राजस्थान के 8 जिले शामिल हैं।
- बामनवास कांकड़ (कोटपूतली-बहरोड़): जनवरी 2026 में उत्तर-पश्चिम भारत की पहली पूर्णतः जैविक प्रमाणित पंचायत बनी।
- मिशन Raj-GIFT: कृषि उत्पादों की GI टैगिंग व बेहतर विपणन हेतु।
