दुर्गा सप्तशती (मार्कंडेय पुराण) में 700 मंत्र हैं। नीचे नवरात्रि साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण 100+ श्लोक उनके सरल हिन्दी अर्थ सहित दिए गए हैं। इन्हें श्रद्धा से पढ़ने या सुनने से मन, बुद्धि और प्राण पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
देवी स्तुति एवं मंगलाचरण
1
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा — हे माते! आपको नमस्कार है।
2
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: हे सर्व मंगलों की मंगल स्वरूपा, शिवा, सभी अर्थों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, तीनों नेत्रों वाली गौरी, नारायणी! आपको नमस्कार है।
3
शरण्यां सर्वभूतानां देवीमुपैमि शरणं शिवाम्।
अर्थ: मैं समस्त प्राणियों को शरण देने वाली कल्याणमयी देवी की शरण में जाता हूँ।
4
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी सभी भूतों में शक्ति रूप से स्थित हैं, उनको बार-बार नमस्कार है।
5
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी सभी प्राणियों में बुद्धि रूप से स्थित हैं, उनको बार-बार नमस्कार।
6
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी सभी में निद्रा रूप से विद्यमान हैं, उनको नमस्कार।
7
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी क्षुधा (भूख) रूप में सभी में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
8
या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी छाया रूप में सभी में हैं, उनको नमस्कार।
9
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी शक्ति रूप में स्थित हैं, उनको बार-बार नमस्कार।
10
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी तृष्णा रूप में सभी में हैं, उनको नमस्कार।
11
या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी क्षमा/सहनशीलता रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
12
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी जाति (उत्पत्ति) रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
13
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी लज्जा रूप में सभी में हैं, उनको नमस्कार।
14
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी शांति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
15
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी श्रद्धा रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
16
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी कांति (तेज) रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
17
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी लक्ष्मी रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
18
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी वृत्ति (व्यवसाय/चेतना की धारा) रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
19
या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी स्मृति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
20
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी दया रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
21
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी तुष्टि (संतोष) रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
22
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी माता रूप में सभी में स्थित हैं, उनको नमस्कार।
23
या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो देवी भ्रांति रूप में भी स्थित हैं (माया), उनको नमस्कार।
24
इन्द्रियाणां अधिष्टात्री भूतानां चाखिलेषु या। भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो इंद्रियों की अधिष्ठात्री हैं और सभी भूतों में व्याप्त हैं, उस व्याप्ति देवी को नमस्कार।
25
चिति रूपेण या कृत्स्नमेतद् व्याप्य स्थिता जगत्। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: जो चिति (चेतना) रूप से पूरे जगत् में व्याप्त हैं, उनको बार-बार नमस्कार।
अर्गला स्तोत्रम् (प्रमुख श्लोक)
26
ॐ जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतापहारिणि। जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: हे चामुण्डा देवी! आपकी जय हो। भूतों का अपहरण करने वाली, सर्वव्यापिनी, कालरात्रि! आपको नमस्कार।
27
मधुकैटभविद्राशि महामाये सुरेश्वरि। नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: मधु-कैटभ का नाश करने वाली, महामाया, सुरेश्वरी, नारायणी! आपको नमस्कार।
28
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: सभी रूपों वाली, सर्वेश्वरी, सर्वशक्ति से युक्त हे दुर्गा देवी! हमें भय से बचाओ। आपको नमस्कार।
29
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥
अर्थ: आप प्रसन्न होकर सभी रोग हर लेती हैं, रुष्ट होकर अभीष्ट कामनाएँ भी हर लेती हैं। आपकी शरण में आने वाले कभी विपत्ति में नहीं पड़ते।
30
सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद् वैरी विनाशनम्॥
अर्थ: हे त्रैलोक्य की अधीश्वरी! सभी बाधाओं का शमन और हमारे शत्रुओं का विनाश आप ही करें।
नवदुर्गा स्तुति
34
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
अर्थ: अभीष्ट लाभ के लिए चंद्रमा की कला धारण करने वाली, वृष पर आरूढ़, शूलधारी, यशस्विनी शैलपुत्री को वंदन।
35
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
अर्थ: हाथों में अक्षमाला और कमण्डलु धारण करने वाली अनुत्तमा ब्रह्मचारिणी मुझ पर प्रसन्न हों।
36
पिण्डजप्रवरारूढा चन्द्रखण्डविभूषिता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
अर्थ: सिंह पर आरूढ़, चंद्रखण्ड से विभूषित, चंद्रघंटा नाम से विख्यात देवी मुझे प्रसाद दें।
37
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: (कूष्माण्डा संदर्भ में भी) माता रूप में स्थित देवी को नमस्कार।
38
सिंहासनगता नित्यं स्कन्दमाता यशस्विनी। दधाना पद्मपत्रांभ्यां शुभदास्तु सदा मम॥
अर्थ: सिंहासन पर विराजमान, यशस्विनी स्कन्दमाता कमल धारण किए सदैव मुझे शुभ दें।
39
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
अर्थ: चन्द्रहास (खड्ग) से उज्ज्वल कर वाली, सिंह वाहना, दानवघातिनी कात्यायनी शुभ दें।
40
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना स्तनप्रिया। कालरात्रिर्मुखं भीमं सा मां पातु सुरेश्वरी॥
अर्थ: एकवेणी, जपापुष्प कर्णपूर, नग्ना, भीममुख वाली कालरात्रि सुरेश्वरी मेरी रक्षा करें।
41
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
अर्थ: श्वेत वृष पर आरूढ़, श्वेताम्बर धारण करने वाली शुचि महागौरी, महादेव को प्रसन्न करने वाली, शुभ दें।
42
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदाऽस्तु मे॥
अर्थ: सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, असुर और अमरों से सेवित सिद्धिदात्री मुझे सदैव सिद्धि दें।
दुर्गा सप्तशती — अध्याय 4 एवं 11 से चयनित
43
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः। नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्॥
अर्थ: महादेवी, शिवा, प्रकृति, भद्रा को निरंतर नमस्कार। हम नियमपूर्वक उन्हें प्रणाम करते हैं।
44
रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नमः। ज्योत्स्नायै चन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नमः॥
अर्थ: रौद्री, नित्या, गौरी, धात्री, ज्योत्स्ना, चन्द्र रूपिणी, सुख स्वरूपा को नमस्कार।
45
कल्याण्यै प्रणतां वृद्ध्यै सिद्ध्यै कुर्मो नमो नमः। नैर्ऋत्यै भूभृतां लक्ष्मै शर्वाण्यै ते नमो नमः॥
अर्थ: कल्याणी, वृद्धि, सिद्धि, नैर्ऋति, भूभृतों की लक्ष्मी, शर्वाणी को नमस्कार।
46
दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै। ख्यात्यै तथाऽनैश्वर्यायै तमोऽध्वनाशनायै नमो नमः॥
अर्थ: दुर्गा, दुर्ग पार करने वाली, सार स्वरूपा, सर्वकारिणी, ख्याति, अनैश्वर्य नाशिनी को नमस्कार।
47
शान्तायै चन्द्रिकायै च नमोऽस्तु परमायै च। सात्त्विक्यै च नमस्तुभ्यं नमो नारायण्यै नमः॥
अर्थ: शांता, चंद्रिका, परमा, सात्त्विकी, नारायणी को नमस्कार।
48
शान्तायै चन्द्रिकायै च नमोऽस्तु परमायै च। सात्त्विक्यै च नमस्तुभ्यं नमो नारायण्यै नमः॥
अर्थ: (पुनरावृत्ति महत्व) शांता, चंद्रिका, परमा, सात्त्विकी, नारायणी।
49
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: शरण आए दीन-आर्त की रक्षा में तत्पर, सभी की आर्ति हरने वाली नारायणी! नमस्कार।
50
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: सर्व स्वरूपा, सर्वेश्वरी, सर्वशक्ति से युक्त दुर्गा देवी! हमें भय से बचाओ।
51
इत्थं यदा पूज्यसे त्वं सरस्वत्या च पार्वति। तदा तुष्टा भवसि देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: जब आपको सरस्वती और पार्वती रूप में पूजा जाता है तब आप तुष्ट होती हैं। नारायणी नमस्कार।
52
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: सर्व मंगलों की मंगल, शिवा, सर्वार्थ साधिका, शरण्या, त्र्यम्बका, गौरी, नारायणी।
अन्य महत्वपूर्ण मंत्र एवं श्लोक
53
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
अर्थ: नवार्ण मंत्र। चामुण्डा देवी का बीज मंत्र — वाक्, माया, काम बीजों से युक्त।
54
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
अर्थ: दुर्गा बीज मंत्र। दुर्गति नाशिनी को नमस्कार।
55
ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः॥
अर्थ: ह्रीं बीज युक्त दुर्गा मंत्र। माया शक्ति के साथ दुर्गा को नमस्कार।
56
ॐ जय दुर्गे महाकालि जय त्रिपुरसुन्दरि। जय दुर्गे महाकाली जय सर्वजगत्प्रिये॥
अर्थ: जय हो महाकाली दुर्गा, त्रिपुरसुन्दरी, सर्व जगत् प्रिया की।
57
अनन्ता चैव सौम्या च दुर्गा दुर्गार्थनाशिनी। जाया च सा त्वं च विद्या त्वं त्वं च सर्वस्य कारणम्॥
अर्थ: आप अनंता, सौम्या, दुर्गा, दुर्गति नाशिनी, जाया, विद्या और सबकी कारण हैं।
58
त्वं स्वाहा त्वं स्वधा त्वं हि वषट्कारः स्वरात्मिका। सुधा त्वमक्षरे नित्ये त्रिधा मात्रात्मिका स्थिता॥
अर्थ: आप स्वाहा, स्वधा, वषट्कार, स्वर रूपा, सुधा, अक्षर, नित्य, तीन मात्राओं में स्थित हैं।
59
अर्धमात्रा स्थिता नित्या यानुच्चार्या विशेषतः। त्वमेव सन्ध्या त्वं सावित्री त्वं देवि जननी परा॥
अर्थ: अर्ध मात्रा में स्थित नित्य, विशेषतः उच्चार्य, आप ही संध्या, सावित्री, परा जननी हैं।
60
त्वया वै धार्यते विश्वं त्वया वै सृज्यते जगत्। त्वया वै पाल्यते देवि त्वं गत्यन्तं च सर्वदा॥
अर्थ: आपसे विश्व धारण होता है, आपसे जगत् सृजित, आपसे पालन, आप ही सबकी अंतिम गति हैं।
61
विसृष्टौ सृष्टिरूपा त्वं स्थितिरूपा च पालने। तथा संहृतिरूपान्ते जगतोऽस्य जगन्मये॥
अर्थ: सृष्टि में सृष्टिरूपा, पालन में स्थितिरूपा, अंत में संहृतिरूपा — जगन्मयी!
62
महाविद्या महामाया महामेधा महास्मृतिः। महामोहा च भवती महादेवी महासुरी॥
अर्थ: आप महाविद्या, महामाया, महामेधा, महास्मृति, महामोहा, महादेवी, महासुरी हैं।
63
प्रकृतिस्त्वं च सर्वस्य गुणत्रयविभाविनी। कालरात्रिर्महागौरी नित्या सत्यानपायिनी॥
अर्थ: आप सर्व की प्रकृति, तीन गुणों की विभाविनी, कालरात्रि, महागौरी, नित्य, सत्यानपायिनी हैं।
64
दुर्गमासि दुराराद्या नित्यमेवासि दुरत्यया। दुरेव सर्वदुःखानां सा त्वं दुर्गा स्मृता जनैः॥
अर्थ: आप दुर्गमा, दुराराध्या, नित्य दुरत्यया हैं। सभी दुःखों से दूर रखने वाली होने से लोग आपको दुर्गा कहते हैं।
65
त्वं वैष्णवीशक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया।
अर्थ: आप वैष्णवी शक्ति, अनंत वीर्य वाली, विश्व का बीज, परमा माया हैं।
66
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥
अर्थ: आपने इस समस्त जगत् को मोहित किया है; प्रसन्न होकर मुक्ति का कारण बनती हैं।
67
विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु।
अर्थ: सभी विद्याएँ आपके भेद हैं, जगत् की सभी स्त्रियाँ आप ही हैं।
68
त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरापरोक्तिः॥
अर्थ: अम्बा! आपने ही इसे भर रखा है। आपकी स्तुति कैसे संभव है?
69
सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिता। स्वर्गादिफलदां देवीं प्रणमामि सदा शिवाम्॥
अर्थ: सभी प्राणियों के हृदय में बुद्धि रूप से स्थित, स्वर्ग आदि फल देने वाली शिवा को सदा प्रणाम।
70
रक्षांसि यत्रोपविशन्ति तत्र यक्षादयश्चापि पतन्ति भूमौ।
अर्थ: जहाँ आपकी रक्षा होती है वहाँ राक्षस आदि यक्ष भी भूमि पर गिर जाते हैं।
नवरात्रि के अन्य प्रचलित श्लोक
71
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
अर्थ: जो कुंद, इंदु, तुषार हार जैसी धवल, शुभ्र वस्त्रावृत, वीणा व वरदण्ड से मण्डित कर, श्वेत पद्मासन पर विराजमान हैं (सरस्वती)।
72
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
अर्थ: ब्रह्मा, विष्णु, शंकर आदि देवों से सदा वंदित, समस्त जड़ता हरने वाली भगवती सरस्वती मेरी रक्षा करें।
73
नमस्तेशरण्ये शिवे सानुकम्पे नमस्ते जगद्व्यापिके विश्वरूपे।
अर्थ: शरण देने वाली शिवा, अनुकंपामयी, जगद्-व्यापिका, विश्वरूपा को नमस्कार।
74
नमस्ते जगद्दीपिके देवदेवि प्रसीद प्रसीद प्रसीद प्रसीद॥
अर्थ: जगत् की दीपिका, देवदेवी! प्रसन्न हों, प्रसन्न हों।
75
नमोऽस्तु ते सर्वजगत्प्रसूते नमोऽस्तु ते सर्वजगत्प्रसूते।
अर्थ: सर्व जगत् की प्रसूति (जननी) को नमस्कार।
76
ॐ श्रीदुर्गायै नमः॥
अर्थ: श्री दुर्गा को नमस्कार।
77
ॐ श्रीमहाकाल्यै नमः॥
अर्थ: महाकाली को नमस्कार।
78
ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नमः॥
अर्थ: महालक्ष्मी को नमस्कार।
79
ॐ श्रीमहासरस्वत्यै नमः॥
अर्थ: महासरस्वती को नमस्कार।
80
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः॥
अर्थ: शक्ति बीज मंत्र समूह। वाक्, माया, लक्ष्मी, काम, परा शक्ति।
81
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥
अर्थ: महालक्ष्मी का बीज मंत्र।
82
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥
अर्थ: सरस्वती बीज मंत्र।
83
ॐ क्रीं कालिकायै नमः॥
अर्थ: कालिका बीज मंत्र।
84
ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः॥
अर्थ: भुवनेश्वरी को नमस्कार।
85
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुरसुन्दर्यै नमः॥
अर्थ: त्रिपुरसुन्दरी को नमस्कार।
86
ॐ ग्लौं गम गणपतये नमः॥
अर्थ: गणपति मंत्र (नवरात्रि प्रारंभ में)।
87
ॐ नमः शिवाय॥
अर्थ: शिव को नमस्कार (शक्ति-शिव एकता)।
88
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
अर्थ: महामृत्युंजय मंत्र। तीन नेत्रों वाले, सुगंधित, पुष्टि बढ़ाने वाले की पूजा। मृत्यु से मुक्त करें, अमृत से नहीं।
89
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
अर्थ: गायत्री मंत्र। सविता के वरेण्य तेज का ध्यान, हमारी बुद्धियों को प्रेरित करें।
90
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः॥
अर्थ: तीनों लोकों में शांति।
अतिरिक्त स्तुति श्लोक (100+ पूर्ण)
91
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
अर्थ: महादेवी शिवा को निरंतर नमस्कार।
92
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्।
अर्थ: प्रकृति भद्रा को नियमपूर्वक प्रणाम।
93
रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नमः।
अर्थ: रौद्री, नित्या, गौरी, धात्री को नमस्कार।
94
ज्योत्स्नायै चन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नमः।
अर्थ: ज्योत्स्ना, चन्द्र रूपिणी, सुख को नमस्कार।
95
कल्याण्यै प्रणतां वृद्ध्यै सिद्ध्यै कुर्मो नमो नमः।
अर्थ: कल्याणी, वृद्धि, सिद्धि को नमस्कार।
96
नैर्ऋत्यै भूभृतां लक्ष्मै शर्वाण्यै ते नमो नमः।
अर्थ: नैर्ऋति, राजाओं की लक्ष्मी, शर्वाणी को नमस्कार।
97
दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै।
अर्थ: दुर्गा, दुर्ग पार करने वाली, सार, सर्वकारिणी।
98
ख्यात्यै तथाऽनैश्वर्यायै तमोऽध्वनाशनायै नमो नमः।
अर्थ: ख्याति, अनैश्वर्य नाशिनी, तम मार्ग नाशिनी को नमस्कार।
99
शान्तायै चन्द्रिकायै च नमोऽस्तु परमायै च।
अर्थ: शांता, चंद्रिका, परमा को नमस्कार।
100
सात्त्विक्यै च नमस्तुभ्यं नमो नारायण्यै नमः॥
अर्थ: सात्त्विकी और नारायणी को नमस्कार।
101
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: शरण आए दीन-आर्त की रक्षा में लगी, सभी की पीड़ा हरने वाली नारायणी।
102
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: सर्व स्वरूपा, सर्वेश्वरी, सर्वशक्ति युक्त दुर्गा! हमें भय से त्राण दो।
103
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा शिवा क्षमा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, शिवा, क्षमा, धात्री, स्वाहा, स्वधा — नमस्कार।
104
ॐ श्रीजगदम्बायै नमः॥
अर्थ: जगदम्बा को नमस्कार।
105
ॐ श्रीपार्वत्यै नमः॥
अर्थ: पार्वती को नमस्कार।
106
ॐ श्रीभवान्यै नमः॥
अर्थ: भवानी को नमस्कार।
107
ॐ श्रीचण्डिकायै नमः॥
अर्थ: चण्डिका को नमस्कार।
108
ॐ श्रीअम्बिकायै नमः॥
अर्थ: अम्बिका को नमस्कार।
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