CBSE ने स्पष्ट किया: कक्षा 10 गणित पेपर पैटर्न में कोई बदलाव नहीं; बेसिक मैथ्स के छात्रों ने कठिनाई स्तर पर जताई चिंता
CBSE ने स्पष्ट किया: कक्षा 10 गणित पेपर पैटर्न में कोई बदलाव नहीं; बेसिक मैथ्स के छात्रों ने कठिनाई स्तर पर जताई चिंता
प्रकाशित: 22 फरवरी 2026
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने हाल ही में आयोजित कक्षा 10 की गणित परीक्षा को लेकर छात्रों की शिकायतों पर स्पष्ट किया है कि पेपर के पैटर्न या प्रश्नों के फ्रेमिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, बेसिक मैथमेटिक्स चुनने वाले छात्रों ने पेपर को अपेक्षा से कहीं अधिक कठिन बताते हुए गहरी निराशा जताई है। कई छात्रों का कहना है कि बेसिक पेपर स्टैंडर्ड पेपर से भी ज्यादा मुश्किल लग रहा था, जो उनके लिए अनुचित है।
CBSE का आधिकारिक बयान
CBSE के परीक्षा नियंत्रक सन्यम भारद्वाज ने कहा कि इस बार गणित पेपर का पैटर्न और फ्रेमिंग पिछले वर्षों जैसा ही रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया:
“प्रश्न पैटर्न या फ्रेमिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह वर्षों से चले आ रहे पैटर्न के अनुरूप ही था। सभी प्रश्न पाठ्यक्रम और सिलेबस पर आधारित थे, जो छात्रों को पढ़ाया गया था।”
एक अन्य CBSE अधिकारी ने बताया कि परीक्षा के बाद कठिनाई स्तर को लेकर शिकायतें आम हैं और हाल के वर्षों में इनकी संख्या बढ़ी है। उन्होंने छात्रों को बेहतर तैयारी की सलाह दी।
बेसिक मैथ्स छात्रों की प्रमुख शिकायतें
बेसिक मैथमेटिक्स आमतौर पर उन छात्रों द्वारा चुना जाता है जो आगे मैथ्स नहीं पढ़ना चाहते और आसान स्कोरिंग की उम्मीद रखते हैं। लेकिन इस बार कई छात्रों ने महसूस किया कि पेपर अपेक्षा से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण था।
- एक छात्रा ने कहा: “मैंने अच्छे अंक (95+ ) की उम्मीद में बेसिक चुना था, लेकिन पेपर स्टैंडर्ड से भी कठिन लगा। यह पूरी तरह अनुचित है।”
- छात्रा ने बताया कि उन्होंने सोचा था बेसिक पेपर ज्यादा एप्लीकेशन-बेस्ड और आसान होगा, लेकिन कई प्रश्न ट्रिकी और समय लेने वाले थे।
- कई छात्रों और शिक्षकों ने कहा कि पेपर लंबा था, MCQs में विस्तृत गणना की जरूरत पड़ी और केस स्टडी प्रश्नों में गहन विश्लेषण की मांग की गई।
शिक्षकों का विश्लेषण
शिक्षकों ने सामान्य गणित पेपर को पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा कठिन बताया। कुछ शिक्षकों का कहना था कि बेसिक पेपर स्टैंडर्ड से ज्यादा लंबा और जटिल था, जिसमें ग्राफ-आधारित प्रश्न और ज्यामिति के कुछ सवाल अपेक्षा से कठिन थे। हालांकि, अधिकांश प्रश्न NCERT से ही थे, लेकिन उनकी प्रस्तुति और फ्रेमिंग बेसिक स्तर के लिए उपयुक्त नहीं लगी।
दो परीक्षा प्रणाली का प्रभाव
CBSE ने इस वर्ष दो बोर्ड परीक्षाओं की व्यवस्था लागू की है, जिससे छात्र मई में दूसरी परीक्षा देकर अंक सुधार सकते हैं। कुछ शिक्षकों का मानना है कि इस कठिन पेपर के कारण अधिक छात्र दूसरी परीक्षा में भाग लेंगे, क्योंकि यह हाई-स्टेक्स प्रेशर को कम करने के लिए बनाई गई है।
निष्कर्ष
CBSE ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन छात्रों की भावनाएं साफ हैं - बेसिक मैथ्स का उद्देश्य कम तनाव देना था, लेकिन इस बार कई छात्रों को धोखा महसूस हुआ। उम्मीद है कि मूल्यांकन में उचित लचीलापन दिखाया जाएगा और भविष्य में ऐसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा। छात्रों को सलाह है कि वे NCERT पर मजबूत पकड़ बनाएं और दूसरी परीक्षा का विकल्प उपलब्ध होने से घबराएं नहीं।
स्रोत: विश्वसनीय शिक्षा समाचार।
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