CBSE बोर्ड परीक्षाओं में डिजिटल क्रांति
CBSE बोर्ड परीक्षाओं में डिजिटल क्रांति
OMR शीट, ऑनलाइन मूल्यांकन और शिक्षकों की तैयारी: एक विस्तृत विश्लेषण
📱 स्क्रीन टाइम और शिक्षकों की चुनौतियां
CBSE द्वारा 17 तारीख से शुरू हो रही 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू की जा रही है। इससे शिक्षकों और छात्रों दोनों के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
शिक्षकों के लिए तकनीकी चुनौतियां
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षक इस ऑनलाइन मूल्यांकन को कैसे करेंगे? क्या उन्हें स्कूल में ही डेस्कटॉप पर काम करना होगा या वे घर से अपने पर्सनल लैपटॉप पर मूल्यांकन कर सकते हैं? इवैलुएशन बुकलेट में टीचर्स को एनोटेट करना है, मिस्टेक्स को पॉइंट आउट करना है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था
यदि iPad या टचस्क्रीन का सिस्टम होता तो शिक्षक आसानी से स्टिक से काम कर लेते। लेकिन हर स्कूल के पास यह इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। इसलिए OMR शीट के माध्यम से चेकिंग उन स्कूलों को ही भेजी जाएगी जहां उचित तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी की समस्या से बचा जा सकेगा।
🎓 छात्रों पर प्रभाव और तैयारी
बच्चों के लिए भी यह नई प्रणाली कुछ बदलाव लेकर आती है। चूंकि सभी छात्र अपने-अपने घरों में चले गए हैं, इसलिए स्कूलों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे छात्रों को उचित निर्देश दें।
चिंता का विषय: परीक्षा का तनाव
प्रिंसिपल के तौर पर यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि छात्रों में एंग्जाइटी लेवल न बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रणाली 10वीं में शुरू की जाती तो बेहतर होता, क्योंकि:
- 10वीं में 20 नंबर के इंटरनल एग्जामिनेशन होते हैं
- यह करियर टेकिंग एग्जाम नहीं है, बल्कि स्ट्रीम सेलेक्शन के लिए है
- 12वीं करियर मेकिंग एग्जाम है - यह आपके भविष्य की दिशा तय करता है
- 12वीं के बाद ही आप अपने करियर के अगले कदम उठाते हैं
🔄 मैनुअल vs डिजिटल मूल्यांकन
| पहलू | मैनुअल चेकिंग | स्क्रीन/डिजिटल चेकिंग |
|---|---|---|
| त्रुटि की संभावना | अधिक | कम (Error-Free) |
| समय | अधिक | कम |
| सब्जेक्टिव आंसर | आसान | चुनौतीपूर्ण |
| MCQ | संभव | बहुत आसान (OMR) |
"क्या हम यह मानकर चलें कि धीरे-धीरे सभी परीक्षाएं MCQ टाइप और OMR शीट पर शिफ्ट होने वाली हैं? इस पर अभी स्पष्टता नहीं है, लेकिन यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब CBSE को देना होगा।"
👨🏫 शिक्षकों की तैयारी: तकनीकी ज्ञान vs विषय ज्ञान
निर्देश में कहा गया है कि स्कूलों को अपने सबसे अच्छे शिक्षकों को इस कार्य के लिए फुली रिलीव्ड करना चाहिए। लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है:
कौशल का संतुलन
सबसे अच्छा टीचर होना और टेक-सेवी भी होना - दोनों का होना आवश्यक है। कुछ शिक्षक विषय ज्ञान में तो बहुत अच्छे हैं, लेकिन तकनीकी रूप से उतने कुशल नहीं हो सकते।
छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति
हर स्कूल इस बदलाव के लिए तैयार नहीं है। विशेषकर:
- टियर-2 और टियर-3 शहर
- ग्रामीण क्षेत्र और देहात
- हिंदी भाषी क्षेत्र
लेकिन अच्छी बात यह है कि OMR शीट और डिजिटल मूल्यांकन के पेपर केवल उन्हीं स्कूलों को भेजे जाएंगे जहां उचित इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है। इससे असमानता की समस्या से बचा जा सकेगा।
🎯 विशेषज्ञ राय: श्री अशोक गांगुली (पूर्व चेयरमैन, CBSE)
क्या हम तैयार हैं?
"निश्चित रूप से यह एक बहुत बड़ी चुनौतीपूर्ण कार्य है जब हम पूरी मूल्यांकन प्रणाली को एक नया मोड़ दे रहे हैं। पहला प्रश्न यह उठता है - क्या हम तैयार हैं? दूसरा प्रश्न - क्या हमने पर्याप्त मॉक ट्रायल किए हैं?"
मूल्यांकन एक गंभीर कार्य है
"मूल्यांकन प्रणाली एक सीरियस बिजनेस है। कक्षा 12 की परीक्षाएं बच्चों के करियर, उनके विषय संयोजन सब कुछ तय करती हैं। यह करियर मेकिंग एग्जाम है। जब यह इतना गंभीर है, तो हम मूल्यांकन प्रणाली को शिक्षकों के कम्फर्ट जोन में नहीं रख सकते।"
निर्धारित समयसीमा की आवश्यकता
"हमें निर्धारित समय सारिणी बनानी पड़ेगी और उसी के भीतर शिक्षकों को मूल्यांकन करना पड़ेगा। यदि हम ऐसा नहीं करेंगे तो:
- सही मूल्यांकन में कठिनाई होगी
- प्रॉक्सी टीचर्स द्वारा मूल्यांकन की संभावना बढ़ जाएगी
केंद्रीय मूल्यांकन प्रणाली का इतिहास
"वर्तमान में जो सेंट्रल इवैल्यूएशन सिस्टम चल रहा है, वह 1980 के दशक के बाद लागू किया गया था। इसका उद्देश्य यह था कि पहले की प्रणाली में प्रॉक्सी टीचर्स द्वारा भी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाता था। यदि हम शिक्षकों के कम्फर्ट जोन में OMR पद्धति रखेंगे, तो यह एक रिग्रेसिव मेजर (प्रतिगामी कदम) होगा।"
तकनीकी अपनाने की आवश्यकता
"जब पूरी दुनिया टेक्नोलॉजी की तरफ बढ़ रही है, और नई टेक्नोलॉजी पुरानी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकती है, तो उस दिशा में बढ़ना चाहिए।"
CBSE की तैयारी
"CBSE ने इस संबंध में कई महीनों पहले से तैयारी शुरू कर दी है। नीति बनाने से पहले प्रिंसिपल्स और अध्यापकों से चर्चा की गई है, कई लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, और मॉक ट्रायल भी किए गए हैं।"
मूल्यांकन संरचना
"सिस्टम में तीन स्तर होंगे:
- हेड एग्जामिनर
- एडिशनल हेड एग्जामिनर
- एग्जामिनर
मुख्य निष्कर्ष:
- इन्फ्रास्ट्रक्चर: केवल उन्हीं स्कूलों को OMR शीट भेजी जाएंगी जहां उचित तकनीकी सुविधाएं हैं
- शिक्षक तैयारी: CBSE ने मॉक ट्रायल और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं
- छात्र मार्गदर्शन: स्कूलों को छात्रों को नई प्रणाली के बारे में उचित जानकारी देनी होगी
- गुणवत्ता: डिजिटल मूल्यांकन error-free होगा और समय की बचत करेगा
- भविष्य: यह भविष्य में सभी परीक्षाओं के डिजिटलाइजेशन की दिशा में एक कदम हो सकता है
🎯 आगे की राह
यह डिजिटल परिवर्तन निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह भारतीय शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सही तैयारी, उचित प्रशिक्षण और तकनीकी इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ, यह प्रणाली न केवल मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी और त्रुटि-रहित बनाएगी, बल्कि शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी।
CBSE और स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे इस संक्रमण काल में शिक्षकों और छात्रों को पर्याप्त समर्थन प्रदान करें, ताकि यह नई प्रणाली सफलतापूर्वक लागू हो सके और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके।
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