राजस्थान का इतिहास एवं कला संस्कृति - महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ) - भाग 12
प्रश्न 487. रज्जब जी एवं माधोदास किस सम्प्रदाय से सम्बन्धित थे?
✔ सही उत्तर: C
व्याख्या: रज्जब जी, माधोदास, सुन्दरदास जी, गरीबदास जी आदि प्रसिद्ध संत दादूदयाल जी के शिष्य थे और दादूपंथ से सम्बन्धित थे।
प्रश्न 488. संत दादूदयाल जी ने विरोध किया था?
(i) कर्मकाण्ड
(ii) जातिप्रथा
(iii) मूर्तिपूजा
(iv) रूढ़िवादिता
✔ सही उत्तर: D
व्याख्या: संत दादूदयाल जी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों, जातिप्रथा, मूर्तिपूजा, कर्मकाण्ड और रूढ़िवादिता का कड़ा विरोध किया और निर्गुण भक्ति का उपदेश दिया।
प्रश्न 489. संत दादूदयाल जी ने ब्रह्म, जीव, जगत एवं मोक्ष पर अपने उपदेश सधुक्कड़ी भाषा में दिये थे, जिस पर प्रभाव था?
✔ सही उत्तर: C
व्याख्या: दादूदयाल जी का मुख्य कार्यक्षेत्र जयपुर और उसके आस-पास का क्षेत्र रहा, अतः उनकी सधुक्कड़ी भाषा पर 'ढूँढाड़ी' बोली का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।
प्रश्न 490. दादूदयाल जी के प्रमुख ग्रंथ थे?
(i) वाणी
(ii) दूहा
(iii) परची
(iv) आरती
✔ सही उत्तर: A
व्याख्या: 'दादूदयाल री वाणी' और 'दादूदयाल रा दूहा' दादूपंथ के सबसे प्रमुख और पवित्र ग्रंथ हैं जिनमें उनके उपदेश संकलित हैं।
प्रश्न 491. संत दादूदयाल जी ने ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी (1603) के दिन ----------- स्थान पर देह त्याग किया था।
✔ सही उत्तर: A
व्याख्या: दादूदयाल जी ने जयपुर जिले के नरेना (नारायणा) में 1603 ई. में अपना देह त्याग किया था। यही दादूपंथ की प्रधान पीठ (मुख्य गद्दी) है।
प्रश्न 492. दादूपंथ में 'दादूखोल' क्या है?
✔ सही उत्तर: B
व्याख्या: भैराणा की पहाड़ी (नारायणा के पास) पर स्थित एक पवित्र गुफा को 'दादूखोल' कहा जाता है, जहाँ दादू जी ने तपस्या की थी।
प्रश्न 493. भैराणा पहाड़ी किस सम्प्रदाय का प्रमुख स्थल है?
✔ सही उत्तर: C
व्याख्या: भैराणा की पहाड़ी (जयपुर ग्रामीण) दादूपंथी सम्प्रदाय का एक अत्यंत पवित्र स्थल है, जहाँ 'दादूखोल' स्थित है।
प्रश्न 494. राजस्थान के संत ------------- ने 1585 में फतेहपुर सीकरी में अकबर से मुलाकात की थी।
✔ सही उत्तर: B
व्याख्या: आमेर के शासक भगवंतदास के प्रयासों से 1585 ई. में संत दादूदयाल जी ने फतेहपुर सीकरी में मुग़ल सम्राट अकबर से भेंट की थी।
प्रश्न 495. दादू दयाल जी के सम्बन्ध में संगत कथन बताइये-
(i) जन्म - 1544 ई. अहमदाबाद (गुजरात) में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन हुआ था।
(ii) राजस्थान के कबीर के नाम से प्रसिद्ध हैं।
(iii) इनके गुरु बुड्ढन (वृद्धानन्द) जी थे।
(iv) 1568 ई. में सांभर में आकर उपदेश देना एवं धुनिया का कार्य प्रारम्भ किया था।
✔ सही उत्तर: D
व्याख्या: संत दादूदयाल जी के जीवन से सम्बन्धित दिए गए ये सभी तथ्य पूर्णतः सत्य हैं। वे 'राजस्थान के कबीर' कहलाते हैं।
प्रश्न 497. मीरा बाई की ----------- प्रसिद्ध है।
✔ सही उत्तर: D
व्याख्या: कृष्णभक्त कवयित्री मीराबाई द्वारा रचित भजन और पद 'पदावलियों' के रूप में विश्व भर में प्रसिद्ध हैं (मीराबाई की पदावलियाँ)।
प्रश्न 498. मीराबाई का अंतिम समय कहाँ बीता था?
✔ सही उत्तर: B
व्याख्या: मीराबाई ने अपने जीवन का अंतिम समय गुजरात के द्वारिका स्थित 'रणछोड़राय जी मंदिर' (डाकोर) में व्यतीत किया था।
प्रश्न 499. निम्न कथनों पर विचार कीजिए-
(i) मीरा बाई की भक्ति माधुर्य भाव की थी।
(ii) इन्होंने ज्ञान से अधिक भावना व श्रद्धा को महत्व दिया था।
✔ सही उत्तर: C
व्याख्या: मीराबाई की कृष्ण भक्ति माधुर्य (दांपत्य) भाव की थी, जिसमें उन्होंने भगवान कृष्ण को अपना पति माना और ज्ञान या कर्मकाण्ड के बजाय शुद्ध भावना और प्रेम को सर्वोच्च स्थान दिया।
प्रश्न 500. मीरा बाई ------------- की प्रसिद्ध संत थी।
✔ सही उत्तर: C
व्याख्या: मीराबाई का जन्म 1498 ई. में हुआ था और उनका अधिकांश जीवन 1500-1550 के बीच बीता, इसलिए वे 16वीं सदी की महान संत कवयित्री थीं।
प्रश्न 501. 'राजस्थान की राधा' किसे कहा जाता है?
✔ सही उत्तर: A
व्याख्या: अपने अलौकिक कृष्ण प्रेम के कारण मीराबाई को 'राजस्थान की राधा' की संज्ञा दी जाती है।
प्रश्न 502. मीराबाई के सम्बन्ध में सत्य कथन बताइये-
(i) जन्म - 1498 ई. कुड़की गाँव (पाली/वर्तमान ब्यावर) में हुआ था।
(ii) पिता - रतनसिंह, दादा - राव दूदा थे।
(iii) रतनसिंह बाजोली के जागीरदार थे।
(iv) विवाह 1516 ई. में भोजराज (राणा सांगा के पुत्र) के साथ हुआ था।
✔ सही उत्तर: D
व्याख्या: मीराबाई के जन्म, पारिवारिक पृष्ठभूमि और विवाह के सन्दर्भ में दिए गए चारों कथन ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः सही हैं।
प्रश्न 503. मीरा बाई को भोजराज की मृत्यु के बाद जहर देने का प्रयास किसने किया था?
✔ सही उत्तर: C
व्याख्या: भोजराज (पति) के देहांत के बाद मेवाड़ के तत्कालीन शासक और भोजराज के भाई राणा विक्रमादित्य ने मीराबाई की भक्ति और साधुओं के साथ सत्संग का विरोध किया और उन्हें मारने के कई प्रयास किये (विष का प्याला, सर्प भेजना)।
प्रश्न 504. 'राजस्थान की दूसरी मीरा' किसे कहा जाता है?
✔ सही उत्तर: B
व्याख्या: नागौर जिले के हरनावा गाँव की प्रसिद्ध कृष्णभक्त संत 'राना बाई' को राजस्थान की 'दूसरी मीरा' कहा जाता है। (नोट: गवरी बाई को वागड़ की मीरा कहा जाता है)।
प्रश्न 505. संत राना बाई का जन्म/मृत्यु/प्रमुख केन्द्र है?
✔ सही उत्तर: B
व्याख्या: राना बाई का जन्म मकराना (नागौर) के पास हरनावा गाँव में हुआ था और यही उनका मुख्य पूजा स्थल एवं कर्मस्थली रहा है।
प्रश्न 506. राना बाई के सम्बन्ध में सत्य कथन बताइये-
(i) जन्म 1504 ई. (वैशाख शुक्ल तृतीया) के दिन हरनावा गाँव (मकराना) में हुआ था।
(ii) रामगोपाल एवं गंगाबाई के घर जन्म लिया था।
(iii) इनके गुरु पालड़ी के संत चतुरदास जी थे।
(iv) हरनावा में भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी को विशाल मेला भरता है।
✔ सही उत्तर: D
व्याख्या: राना बाई (राजस्थान की दूसरी मीरा) के जीवन परिचय और उनके गुरु (संत चतुरदास जी) से सम्बन्धित ये सभी तथ्य पूर्णतः सत्य हैं।
प्रश्न 508. बेणेश्वर धाम मेला भरता है?
✔ सही उत्तर: B
व्याख्या: डूंगरपुर के नवाटापरा में सोम, माही और जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर प्रतिवर्ष 'माघ पूर्णिमा' को आदिवासियों का प्रसिद्ध बेणेश्वर मेला (आदिवासियों का कुम्भ) लगता है।
प्रश्न 509. संत जिनकी शंख, चक्र, गदा एवं पद्म सहित घोड़े पर सवार चतुर्भुज मूर्ति है?
✔ सही उत्तर: C
व्याख्या: संत मावजी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, इसलिए इनकी चतुर्भुज प्रतिमा में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित है और वे घोड़े पर सवार हैं।
प्रश्न 510. भगवान विष्णु के दसवें अवतार 'कल्कि' के रूप में प्रसिद्ध संत हैं?
✔ सही उत्तर: A
व्याख्या: वागड़ क्षेत्र के आराध्य देव संत मावजी को भगवान विष्णु का दसवाँ 'कल्कि अवतार' (निष्कलंक अवतार) माना जाता है।
प्रश्न 511. संत मावजी का प्रमुख मंदिर स्थित है?
✔ सही उत्तर: C
व्याख्या: संत मावजी का जन्म और उनका मुख्य भव्य मंदिर डूंगरपुर जिले के 'साबला' गाँव में स्थित है।
प्रश्न 512. संत मावजी ने लसाड़ा गाँव के पटेल भक्त की धनराशि से अहमदाबाद से कागज मंगवाकर ------------ नामक स्थान पर पांच बड़े ग्रंथ लिखे थे जिन्हें 'चोपड़ा' कहा जाता है।
✔ सही उत्तर: B
व्याख्या: मावजी ने 'धोलागढ़' नामक एकांत स्थान पर बैठकर अपने प्रसिद्ध ग्रंथ लिखे थे, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'चोपड़ा' कहा जाता है।
प्रश्न 513. मावजी द्वारा लिखित चोपड़ों में छंद हैं?
✔ सही उत्तर: A
व्याख्या: मावजी द्वारा लिखित 5 चोपड़ों (ग्रंथों) में कुल मिलाकर 72 लाख 96 हजार छंद (पद्य) बताए जाते हैं।
प्रश्न 514. मावजी के चोपड़ा किस शैली में लिखे गए थे?
✔ सही उत्तर: B
व्याख्या: संत मावजी के चोपड़े (ग्रंथ) संवाद शैली (वाद-विवाद या प्रश्नोत्तर रूप) में लिखे गए हैं, जिनमें भविष्यवाणियां भी संकलित हैं।
प्रश्न 515. संत मावजी के ग्रंथ 'चोपड़ा' किस पर्व के दिन दर्शन हेतु मंदिरों में रखा जाता है?
✔ सही उत्तर: C
व्याख्या: मावजी के पवित्र चोपड़े वर्ष में केवल एक बार 'दीपावली' के अवसर पर ही दर्शनार्थ बाहर निकाले जाते हैं।
प्रश्न 516. संत मावजी द्वारा स्थापित धार्मिक स्थल है?
✔ सही उत्तर: A
व्याख्या: संत मावजी ने सोम, माही और जाखम के संगम पर जिस पवित्र धाम की स्थापना की, उसे 'वेण वृन्दावन' (वर्तमान बेणेश्वर धाम) का नाम दिया था।
प्रश्न 517. संत मावजी द्वारा स्थापित सम्प्रदाय है?
✔ सही उत्तर: B
व्याख्या: संत मावजी ने समाज में पवित्रता और आध्यात्मिक चेतना जगाने के लिए 'निष्कलंक सम्प्रदाय' की स्थापना की थी।
प्रश्न 518. सत्य कथन का चयन कीजिए-
(i) संत मावजी का जन्म 1714 ई. में साबला गाँव में हुआ था।
(ii) संत मावजी ने बेणेश्वर धाम में तपस्या की थी।
(iii) संवत् 1784 ई. माघ शुक्ल एकादशी के दिन ज्ञान प्राप्ति हुई थी।
✔ सही उत्तर: D
व्याख्या: संत मावजी के जन्म, तपस्या स्थल और ज्ञान प्राप्ति से जुड़े उपर्युक्त सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं।
प्रश्न 519. 'फूलडोल मेला' किस सम्प्रदाय की प्रमुख विशेषता है?
✔ सही उत्तर: A
व्याख्या: शाहपुरा (भीलवाड़ा) में रामस्नेही सम्प्रदाय का मुख्य महोत्सव 'फूलडोल मेला' कहलाता है, जो होली के बाद चैत्र माह में आयोजित होता है।
प्रश्न 520. सुमेलित कीजिए (रामस्नेही सम्प्रदाय की पीठ और संस्थापक)-
(A) शाहपुरा - (i) रामदास जी
(B) रैण - (ii) दरियावजी
(C) सिंहथल - (iii) रामचरण जी
(D) खेड़ापा - (iv) हरिराम दास जी
✔ सही उत्तर: A
व्याख्या: सही सुमेलन इस प्रकार है: शाहपुरा शाखा - रामचरण जी, रैण (मेड़ता) - दरियाव जी, सिंहथल (बीकानेर) - हरिराम दास जी, और खेड़ापा (जोधपुर) - रामदास जी।
प्रश्न 521. 'अणभैवाणी' ग्रंथ लिखा था?
✔ सही उत्तर: C
व्याख्या: रामस्नेही सम्प्रदाय (शाहपुरा शाखा) के प्रवर्तक स्वामी रामचरण जी के उपदेशों का संग्रह 'अणभैवाणी' (अणभै वांणी) कहलाता है।
प्रश्न 522. संत रामचरण जी के लिए शाहपुरा के राजा ----------- ने छतरी का निर्माण करवाया था।
✔ सही उत्तर: C
व्याख्या: शाहपुरा के शासक रणसिंह ने संत रामचरण जी के लिए निवास स्थान और बाद में उनकी स्मृति में छतरी का निर्माण करवाया था।
प्रश्न 523. रामचरण जी के सम्बन्ध में सत्य कथन बताइये-
(i) इनका जन्म सोडा गाँव में 1719 ई. (माघ शुक्ल 14) के दिन हुआ था।
(ii) बखतराम एवं देवजी के घर वैश्य कुल में जन्म हुआ।
(iii) बचपन का नाम रामकिशन था।
(iv) गुरु - कृपाराम जी (दांतड़ा) थे।
✔ सही उत्तर: D
व्याख्या: संत रामचरण जी (रामस्नेही सम्प्रदाय के शाहपुरा पीठ के प्रवर्तक) के जीवन परिचय से सम्बंधित ये सभी कथन सत्य हैं।