आठ प्रहर के बारे में जानें

आठ प्रहर के बारे में जानें

आठ प्रहर के बारे में जानें

1. दिन का प्रथम प्रहर – पूर्वाह्न (प्रातः 6 से 9 बजे तक)

सूर्योदय के समय दिन का पहला प्रहर माना जाता है, जिसे पूर्वाह्न कहा जाता है। यह प्रहर ध्यान, पूजा-पाठ और शिक्षा के लिए उत्तम माना जाता है। इस समय कोई भी शुभ कार्य या संकल्प अत्यंत फलदायी होता है। इस प्रहर की कमजोरी मानसिक क्लेश और शारीरिक थकावट नहीं लाती बल्कि मानसिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा और भविष्य की योजना बनती है।

2. दिन का दूसरा प्रहर – मध्याह्न (प्रातः 9 से 12 बजे तक)

इस प्रहर में मनुष्य सबसे ज्यादा सक्रिय होता है, इसलिए कार्य करने की क्षमता बढ़ जाती है। यह समय कार्यों (कर्म) का समय होता है। विद्यार्थी, व्यवसायी एवं कर्मचारी इस समय का भरपूर लाभ उठा सकते हैं। शास्त्रों में इस प्रहर को सफलता और कर्म की प्रधानता वाला समय बताया गया है।

3. दिन का तीसरा प्रहर – अपराह्न (दोपहर 12 से 3 बजे तक)

यह भोजन और विश्राम का समय माना जाता है। इस समय अधिक श्रम करने से बचना चाहिए। यह तामसिक गुणों का समय होता है, लेकिन नकारात्मक नहीं। इस प्रहर में अधिक ऊर्जा नहीं रहती इसलिए यह समय मानसिक विश्राम और योजनाओं की समीक्षा के लिए अच्छा माना जाता है।

4. दिन का चौथा प्रहर – सायंकाल (03 बजे से 06 बजे तक)

दिन के चौथे और अंतिम प्रहर को सायंकाल कहते हैं। यह समय संध्या आराधना का होता है। धार्मिक कार्य, मंत्र जाप, ध्यान व योग के लिए यह समय अत्यंत शुभ होता है। यह समय मन की एकाग्रता को बढ़ाने में सहायक होता है। इस समय स्वास्थ्य की चिंता और आत्मावलोकन के लिए यह समय विशेष माना गया है।

5. रात का प्रथम प्रहर – प्रदोष काल (शाम 6 बजे से 9 बजे तक)

यह प्रहर स्त्रियों की पूजा तथा किसी भी प्रकार के विनम्र कार्यों के लिए उपयुक्त माना गया है। यह समय घर में शांति बनाए रखने, संयमित भोजन और परिवार के साथ समय बिताने के लिए उत्तम होता है। पूजा और दीप जलाने का यह समय सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

6. रात का दूसरा प्रहर – निशीथ काल (रात 9 बजे से 12 बजे तक)

यह प्रहर मानसिक और राजसी प्रवृत्तियों की अधिकता का समय होता है। इस समय योगिनी शक्तियों की उपासना की जाती है। यह प्रहर रात्रिकालीन साधनाओं के लिए सर्वोत्तम होता है। आध्यात्मिक साधक इस समय को विशेष रूप से उपयोग में लेते हैं।

7. रात का तीसरा प्रहर – त्रियामा प्रहर (रात 12 से 3 बजे तक)

इसे मध्यरात्रि भी कहते हैं। यह समय रात्रि का तामसिकतम प्रहर होता है और ध्यान, तपस्या, मनन, साधना, स्वप्नदर्शन, और आत्मचिंतन के लिए उपयुक्त माना गया है। इस प्रहर में शारीरिक ऊर्जा सबसे कम होती है।

8. रात का चौथा प्रहर – उषा काल (रात 3 से 6 बजे तक)

इस प्रहर को ब्रह्म मुहूर्त भी कहते हैं। यह प्रहर आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम होता है। इस समय की गई साधना, योग और प्रार्थना जीवन को दिशा देने वाली होती है। आयुर्वेद के अनुसार इस समय उठने से शरीर स्वस्थ और मन प्रसन्न रहता है।

लेखक: NEXTPRAYAS

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