राजस्थान के प्रतीक चिन्ह
राजस्थान सरकार की ऑफिसियल वेबसाइट के अनुसार, राज्य के कुल 7 प्रतीक चिन्ह हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक, प्राकृतिक और पारंपरिक विरासत को दर्शाते हैं। ये प्रतीक हैं – राज्य पशु (पालतू और वन्य), राज्य पक्षी, राज्य वृक्ष, राज्य पुष्प, राज्य नृत्य और राज्य खेल।
राज्य पशु – ऊंट (पालतू पशु)
राजस्थान का राज्य पशु ऊंट है, जिसे 30 जून 2014 को तत्कालिक मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में बीकानेर में आयोजित राज्य कैबिनेट बैठक में राज्य पशु घोषित किया गया। अधिसूचना सितम्बर 2014 में जारी हुई।
- वैज्ञानिक नाम: कैमेलस ड्रोमेडेरियस
- उपनाम: मरूथिल का जहाज
- महत्व: देश में राजस्थान का 84% हिस्सा ऊंट पालन से जुड़ा है और जैसलमेर जिले में ऊंटों की सबसे अधिक संख्या पाई जाती है।
- अनुसंधान एवं महोत्सव: बीकानेर में राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केन्द्र 1984 में स्थापित हुआ, जिसे 20 सितम्बर 1995 को अनुसंधान केन्द्र रूप में क्रियान्वित किया गया। प्रतिवर्ष जनवरी में अन्तर्राष्ट्रीय ऊंट महोत्सव भी आयोजित होता है।
- कलात्मक पहल: ऊंट की खाल पर चित्रकारी करने की कला (मुनव्वती कला) और केमल हाईड ट्रेनिंग सेन्टर बीकानेर में स्थापित है।
राज्य पशु – चिंकारा (वन्य पशु)
चिंकारा को 22 मई 1981 को राजस्थान का राज्य पशु घोषित किया गया। यह वन्य जीव राजस्थान की प्राकृतिक विविधता का प्रतीक है।
- वैज्ञानिक नाम: गजेला बनेट्टी
- विशेषता: चिंकारा राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में आसानी से पाई जाती है।
राज्य पक्षी – गोडावण
1981 में गोडावण को राजस्थान का राज्य पक्षी घोषित किया गया। इसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, सोन चिड़िया, गुधनमेर और हुकना के नाम से भी जाना जाता है।
- वैज्ञानिक नाम: क्रायोटिस नाइग्रीसेप्स
- निवास स्थान: मरू उद्यान (जैसलमेर), सोरसन (बारीं) और सोंकलिया।
- प्रजनन केन्द्र: जैसलमेर में कृत्रिम प्रजनन केन्द्र एवं सोरसन (बारा) में केप्टिव ब्रिडिंग सेन्टर स्थापित हैं।
- डाक टिकट: 1 नवम्बर 1980 को 2.30 पैसे का डाक टिकट जारी किया गया।
राज्य वृक्ष – खेजड़ी
खेजड़ी को 31 अक्टूबर 1983 को राजस्थान का राज्य वृक्ष घोषित किया गया। यह वृक्ष राजस्थान के शुष्क इलाकों में जीवन का प्रतीक है।
- वैज्ञानिक नाम: प्रोसोपिस सिनेरेरिया
- डाक टिकट: 5 जून 1988 को 60 पैसे का डाक टिकट जारी किया गया।
- अन्य नाम: राजस्थान का गौरव, थार का कल्पवृक्ष, स्थानीय नाम सीमलो/जांटी और ग्रन्थों में 'शर्मी किस्म – थार शोभा'।
- सांस्कृतिक महत्त्व: दशहरे के अवसर पर पूजा, खेजड़ी वृक्ष मेला (खेजड़जी गांव में, भाद्रपद शुक्ल दशमी को) एवं कई ऐतिहासिक बलिदान की घटनाएं (रामासनी घटना, पोलावास घटना, खेजड़ली घटना) से जुड़ा है।
राज्य पुष्प – रोहिड़ा
रोहिड़ा को 31 अक्टूबर 1983 को राजस्थान का राज्य पुष्प घोषित किया गया।
- वैज्ञानिक नाम: टिकोमेला अण्ड्लेटा
- अन्य नाम: राजस्थान की मरूशोभा, मरूस्थल का सागवान।
राज्य नृत्य – घूमर
घूमर राजस्थान के लोक नृत्यों में सबसे प्रमुख है और इसे राज्य की आत्मा कहा जाता है। यह नृत्य राजपूत महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया जाता है, साथ ही भील जाति तथा गरासिया जनजाति की महिलाओं द्वारा भी अपने-अपने रूप में किया जाता है।
- प्रकार: झूमरियो (बालिकाओं द्वारा किया जाने वाला नृत्य) तथा लूर (गरासिया जनजाति द्वारा किया जाने वाला रूप)।
राज्य खेल – बास्केटबॉल
राज्य खेल के रूप में बास्केटबॉल को तत्कालिक मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया के कार्यकाल में घोषित किया गया है। यह खेल राजस्थान के युवाओं में खेल भावना और सक्रियता को दर्शाता है।
राजस्थान के ये प्रतीक न केवल राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को दर्शाते हैं, बल्कि इनकी उपस्थिति हमारे इतिहास, कला और परंपराओं की गहराई को भी उजागर करती है।

0 Comments