तीन छन्नी परीक्षण: चाणक्य की शिक्षाप्रद कहानी
एक दिन चाणक्य से मिलने उनका एक परिचित आया। उसने कहा,
“क्या तुम जानते हो कि मैंने तुम्हारे मित्र के बारे में क्या सुना है?”
चाणक्य ने मुस्कराते हुए जवाब दिया,
“रुको! इससे पहले कि तुम कुछ कहो, मैं तुम्हारी बात को तीन छन्नी परीक्षण से परखना चाहूँगा।”
पहली छन्नी: सत्य
“क्या जो बात तुम बताने जा रहे हो, वह पूर्णतः सत्य है?”
“जी नहीं, मैंने बस सुना है…”
“तो इसका मतलब है कि तुम्हें खुद नहीं पता कि बात सच है या झूठ।”
दूसरी छन्नी: भलाई
“क्या यह बात मेरे मित्र के बारे में कुछ अच्छा बताती है?”
“नहीं, बल्कि यह नकारात्मक बात है…”
“तो यह बात न तो सत्य है और न ही भलाई से जुड़ी है।”
तीसरी छन्नी: उपयोगिता
“क्या यह बात मेरे लिए किसी काम की है?”
“शायद नहीं…”
“तो यह बात न सत्य है, न हितकारी और न ही उपयोगी… फिर इसे कहने का कोई मतलब नहीं।”
शिक्षा: जब भी आप किसी की नकारात्मक बात सुनें, उसे कहने या आगे बढ़ाने से पहले तीन छन्नी परीक्षण ज़रूर करें – सत्य, भलाई, और उपयोगिता।


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