उम्मीद का दीया

✨ उम्मीद का दीया ✨

एक घर में पाँच दीये जल रहे थे। एक दिन पहले दीये ने दुखी होकर कहा –

“इतना जलकर भी मेरी रोशनी की लोगों को कोई कदर नहीं है, अब मुझे बुझ जाना चाहिए।”

और वह दीया बुझ गया। वो दीया था उत्साह का प्रतीक।

यह देखकर दूसरा दीया जो शांति का प्रतीक था, बोला –

“जब मेरी रोशनी से भी लोग हिंसा करते हैं, तो मेरा जलना व्यर्थ है।”

वह भी बुझ गया। फिर तीसरे दीये ने, जो हिम्मत का प्रतीक था, अपनी हिम्मत खो दी और बुझ गया।

अब जब उत्साह, शांति और हिम्मत का अस्तित्व नहीं रहा, तो समृद्धि का चौथा दीया भी बुझ गया।

अब केवल एक दीया जल रहा था – वह था सबसे छोटा, लेकिन अडिग और अविरल

तभी एक छोटा लड़का कमरे में आया और देखा कि एक दीया अभी भी जल रहा है।

वह खुश हो गया क्योंकि कम से कम उम्मीद का दीया अभी बाकी था।

उसने उसी जलते दीये से बाकी चारों दीयों को फिर से जला दिया।

जानिए वो अंतिम दीया कौन था?
वह था – “उम्मीद का दीया”

जीवन में चाहे कुछ भी हो जाए…

अगर उम्मीद का दीया जलता रहे, तो बाकी सब दीये फिर से जल सकते हैं।

चाहे सब बुझ जाए,
लेकिन उम्मीद का दीया न बुझने देना!

उम्मीद रखो… क्योंकि एक दीया भी अंधेरे को खत्म कर सकता है।

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