Power of Positive Thoughts
एक व्यक्ति हमेशा परेशान और तनाव में रहता था। उसे लगता था कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी के ऊपर है, खर्चों का बोझ बढ़ रहा है, और लोग उसकी कदर नहीं करते।
एक दिन उसका बेटा होमवर्क कराने आया, लेकिन वह पहले से ही तनाव में था, तो उसने बेटे को डांट दिया। बाद में जब उसने बेटे की कॉपी उठाई, तो उस पर लिखा था:
“वे चीजें जो हमें शुरू में अच्छी नहीं लगतीं लेकिन बाद में वे अच्छी ही होती हैं।”
बच्चे ने लिखा:
- फाइनल एग्जाम अच्छे नहीं लगते लेकिन उनके बाद छुट्टियाँ मिलती हैं।
- कड़वी दवाइयाँ बुरी लगती हैं लेकिन वे बीमारी ठीक करती हैं।
- अलार्म घड़ी कर्कश होती है लेकिन वह बताती है कि मैं जीवित हूँ।
- पापा की डांट बुरी लगती है लेकिन वे मुझे सबसे अच्छी चीजें भी दिलाते हैं।
बच्चे की आखिरी लाइन ने उसकी आँखें खोल दी:
“मेरे पास पिता हैं, जबकि मेरे दोस्त सोहन के तो पिता ही नहीं हैं।”
अब उसकी सोच बदल गई:
- मुझे खर्च उठाने पड़ते हैं, इसका मतलब मेरे पास घर है।
- जिम्मेदारी है, इसका मतलब मेरा परिवार है।
- रिश्तेदार आते हैं, इसका मतलब मेरे अपने हैं।
हे भगवान! मुझे माफ़ करना, मैं तेरी कृपा को पहचान नहीं पाया।
उस दिन से उसने हर परिस्थिति को सकारात्मक दृष्टि से देखना शुरू कर दिया और उसकी चिंताएँ दूर हो गईं।
जब हमारी सोच बदलती है, तब हमारी ज़िंदगी भी बदल जाती है। यही है Power of Positive Thoughts।
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